
इंदौर दूषित जल कांड, पानी में मिला ड्रेनेज जो गटर के मल-मूत्र में होते हैं
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। दूषित पानीसे मरने वालों की संख्या 15 पहुंच गई है। बता दें कि गत मंगलवार को आठ लोगों की जान चली गई थी।
देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर में दूषित पानी से मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। गुरुवार को कुलकर्णी नगर निवासी 43 वर्षीय अरविंद लिखार की उपचार के दौरान मौत हो गई। इसके साथ ही दूषित पानी से मरने वालों की संख्या 15 पहुंच गई है।
गत मंगलवार को आठ लोगों की जान चली गई थी। अब तक करीब 2800 मरीज सामने आए हैं। इनमें से 201 का विभिन्न अस्पतालों में इलाज चल रहा है। 32 मरीज आइसीयू में भर्ती हैं।
शहर के भागीरथपुरा से लिए गए पानी के सैंपलों की जांच रिपोर्ट गुरुवार को सामने आ गई। एमजीएम मेडिकल कॉलेज और नगर निगम की लैब, दोनों ने पुष्टि की है कि रहवासी नर्मदा जल समझकर जो पानी पी रहे थे, उसमें ड्रेनेज मिला हुआ था। पानी में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं जो इस्तेमाल के लायक भी नहीं था।
मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने स्वत: संज्ञान लिया है। आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और दो सप्ताह में मामले पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने कहा कि खबरों के मुताबिक लोग लगातार दूषित पानी की शिकायत कर रहे, लेकिन अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने गुरुवार को चार मृतकों के स्वजन को दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि के चेक सौंपे। इस दौरान रहवासियों ने नाराजगी जताई और कहा कि शासन वास्तविक मौतों से कम आंकड़ा मान रहा है। विजयवर्गीय ने स्वीकार किया कि वास्तविक संख्या अधिक हो सकती है और डायरिया से हुई मौतों की जांच कर सहायता दी जाएगी।

