
कुत्तों के लिए बनेगा मेगा शेल्टर, नगर निगम ने तैयार की योजना
गोरखपुर में नगर निगम सीमा के आसपास के 10 किलोमीटर के क्षेत्र में कुत्तों की गणना की जाएगी। यह गणना दो महीने में पूरी होगी। इस दौरान कुत्तों की संख्या का अनुमान लगाया जाएगा ताकि शहर में एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम को बेहतर ढंग से लागू किया जा सके और आवारा कुत्तों के प्रबंधन में मदद मिल सके।
पिछले कुछ वर्षों में नगर निगम क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या में इजाफा हुआ है, जिससे आम नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुत्तों के काटने की घटनाएं, सड़क दुर्घटनाएं और स्वच्छता से जुड़ी समस्याएं लगातार सामने आ रही हैं। ऐसे में नगर निगम का यह प्रयास न केवल कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने में मदद करेगा।
नगर निगम शहर के करीब 7,000 आवारा कुत्तों को सड़कों और सार्वजनिक जगहों से हटाकर सुरक्षित शेल्टर होम में रखने की एक बड़ी योजना बना रहा है। इस योजना के लिए निगम ने पूरा बजट तैयार करके सरकार को मंज़ूरी के लिए भेज दिया है। प्रस्ताव के मुताबिक, इस डॉग शेल्टर को बनाने के लिए 15.75 एकड़ जमीन चाहिए होगी और शेल्टर के निर्माण पर ही करीब 29 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
इन शेल्टरों को चलाने और उनका रखरखाव करने पर हर साल 16.92 करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च आएगा। इसमें सबसे बड़ा खर्च कुत्तों के खाने पर होगा, जिसका अनुमान 50 रुपये प्रति कुत्ता रोजाना के हिसाब से सालाना 12.77 करोड़ रुपये है। इसके अलावा, दवाओं पर सालाना 1.27 करोड़ रुपये, डिवार्मिंग (पेट के कीड़ों की दवा) पर 28 लाख रुपये, और टीकाकरण पर 1.05 करोड़ रुपये खर्च होगा।
इन सभी कुत्तों की देखभाल के लिए मानव संसाधन पर भी सालाना 1.54 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें 7 पशु चिकित्सक, 2 फार्मासिस्ट, 14 पैरावेट और 33 स्वीपर रखने का प्रस्ताव है। यह पूरी योजना शहर को सुरक्षित बनाने और आवारा पशुओं की उचित देखभाल सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है।

