गोरखपुर GIDA की अधिग्रहीत भूमि पर फसलें लहलहाईं, प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

गोरखपुर में गीडा द्वारा पिपरौली के अड़िलापार में सीईटीपी के लिए अधिग्रहीत 15 एकड़ जमीन पर फसलें लहलहा रही हैं। किसानों को मुआवजा मिलने और गीडा के कब्जे के दावे के बावजूद यह स्थिति है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं और अधिग्रहण करने वाले किसानों में रोष है।

प्रदेश सरकार जहां सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के खिलाफ सख्त अभियान चला रही है, वहीं गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) के क्षेत्र में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। गीडा द्वारा कामन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) के निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई जमीन पर फसल लहलहाती देखी जा रही है, जिससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, फैक्ट्रियों से निकलने वाले दूषित जल के शोधन के उद्देश्य से गीडा प्रशासन ने पिपरौली ब्लाक के अड़िलापार क्षेत्र में लगभग 15 एकड़ भूमि अधिग्रहित की है। यह जमीन करीब एक दर्जन किसानों से ली गई थी, जिनको नियमानुसार मुआवजा भी दिया जा चुका है। भूमि अधिग्रहण के बाद गीडा द्वारा मौके पर तारबंदी कराकर जमीन को अपने कब्जे में बताया जा रहा है।
मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हो गई हैं और लोग गीडा प्रशासन से स्पष्ट कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। गीडा के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी रामप्रकाश ने बताया कि अड़िलापार स्थित भूमि गीडा के पूर्ण कब्जे में है। प्लांट की स्वीकृति मिलते ही तत्काल निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा।

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