अजित पवार, संघर्ष की सियासत से बनाई अलग पहचान

महाराष्ट्र की राजनीति के प्रमुख चेहरों में शामिल अजित पवार लंबे समय से राज्य की सियासत में अहम भूमिका निभाते रहे हैं। दूर्भाग्यपूर्ण रूप से आज सुबह बारामती में उप मुख्यमंत्री अजित पवार का विमान हादसे का शिकार हो गया। 66 वर्ष की उम्र में उनका निधान हो गया।

अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वाकांक्षी और प्रभावशाली नेता माना जाता है, उनका जाना महाराष्ट्र के साथ देश की राजनीति के लिए भी बड़ी क्षति है।
अजित पवार को पिछले 13 वर्षों में छठवीं बार उप मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। वह महाराष्ट्र के सबसे लंबे समय तक गैर-लगातार उप मुख्यमंत्री रहने वाले नेता भी रहे। वह एनसीपी प्रमुख शरद पवार के बड़े भाई अनंतराव पवार के बेटे है। अजित पवार ने राजनीति की शुरुआत 1982 में की, जब वह मात्र 20 वर्ष के थे। उन्होंने सबसे पहले एक चीनी सहकारी संस्था का चुनाव लड़ा।
1991: पुणे जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने, 16 साल तक इस पद पर रहे।
1991: बारामती से लोकसभा के लिए चुने गए, लेकिन अपने चाचा शरद पवार के लिए सीट छोड़ दी। उसी वर्ष महाराष्ट्र विधानसभा के लिए चुने गए।
1992-1993: कृषि और बिजली राज्य मंत्री बने।
साल 1995, 1999, 2004, 2009 और 2014 में बारामती निर्वाचन क्षेत्र से वह लगातार जीतते रहे।
उन्होंने कृषि, बागवानी, बिजली और जल संसाधन मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने कृष्णा घाटी और कोकण सिंचाई परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाली।
अजित पवार को महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वाकांक्षी और प्रभावशाली नेता माना जाता है। 2009 के विधानसभा चुनाव के बाद उन्होंने उप मुख्यमंत्री बनने की इच्छा जताई थी, लेकिन उस समय यह पद छगन भुजबल को मिला। हालांकि, दिसंबर 2010 में वह पहली बार उप मुख्यमंत्री बने। 2013 में उनका नाम सिंचाई घोटाले से जुड़े विवाद में आया और उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। बाद में उन्हें क्लीन चिट मिली और वह फिर से पद पर लौटे।
अजित पवार को एक मजबूत संगठनकर्ता और प्रशासनिक अनुभव वाले नेता के रूप में देखा जाता रहा। उनके और चाचा शरद पवार के बीच राजनीतिक मतभेदों की चर्चा भी होती रही है, लेकिन उन्होंने हमेशा खुद को शरद पवार का अनुयायी बताया है। आज अजित पवार महाराष्ट्र की सत्ता राजनीति के सबसे अहम चेहरों में शामिल रहे और राज्य की राजनीति में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जाती था।

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