राष्ट्रपति भवन ने दिया स्टेट डिनर, तरह – तरह के व्यंजन, जानिए रूसी राष्ट्रपति ने क्या खाया

रूस के प्रेसीडेंट व्लादिमीर पुतिन भारत की यात्रा पर आए हुए थे. उनके सम्मान में राष्ट्रपति द्वारा स्टेट डिनर आयोजित किया गया था। लेकिन भारत में वह होटल या राष्ट्रपति भवन में दिए जाने वाले भोज का आनंद नहीं ले सके। बल्कि इसके लिए वह अपनी एक खास किचन टीम भी सात ले आए हैं, जो उनके लिए खाना भी बनाएगी बल्कि इसकी क्वालिटी भी चेक करेगी।

रूस के प्रेसीडेंट व्लादिमीर पुतिन भारत की यात्रा पर आए हुए थे। उनके सम्मान में राष्ट्रपति द्वारा स्टेट डिनर आयोजित किया गया था। लेकिन भारत में वह होटल या राष्ट्रपति भवन में दिए जाने वाले भोज का आनंद नहीं ले सके। भारत में वह होटल या राष्ट्रपति भवन में दिए जाने वाले भोज का आनंद नहीं ले सके। व्लादिमीर पुतिन जब भी रूस से बाहर जाते हैं तो उनके साथ एक पूरी ‘शेफ टीम’ चलती है। उनके IL-96 विमान में एक अलग कम्पार्टमेंट में पैक रूसी त्वोरोग, रूसी आइसक्रीम, रूसी शहद और रूसी बोतलबंद पानी वे अपने साथ लाते है।
दिसंबर 2014 में जब पुतिन भारत आए थे तो मुंबई के ताज होटल के एक पूरे फ्लोर को रूसी सिक्योरिटी एजेंसी FSO ने कब्जे में ले लिया था। होटल के किचन से सारा भारतीय मसाला हटा दिया गया था।
2018 में भी भारत-रूस समिट के दौरान भी रूसी शेफ ने ही हैदराबाद हाउस के किचन में अपना स्टोव लगाया थ। 6 अक्टूबर 2018 को द हिंदू ने लिखा था, ‘राष्ट्रपति भवन में बिरयानी और गलौटी कबाब तैयार हुए थे, लेकिन पुतिन ने सिर्फ अपना रूसी सलाद और त्वोरोग खाया था।’ पुतिन ने हर बार की तरह इस बार भी भारतीय शेफ के हाथों के खाने से परहेज किया। ऐसा नहीं है कि वे भारतीय खाना नहीं खाते बल्कि किसी भी देश में वे अपने ही साथ लाया हुआ भोजन इस्तेमाल करते हैं। 2001 से ही पुतिन के विदेशी दौरे पर ‘पोर्टेबल फूड लेबोरेटरी’ जाती है। यह लैब हर डिश को स्पेक्ट्रोमीटर और कैमिकल टेस्ट से चेक करती है। रूस टुडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन का खाना मॉस्को के बाहर बने एख स्पेशल फार्म से आता है, जहां दूध देने वाली गायों की 24 घंटे निगरानी होती है। यानी अन्य देश का खाना, सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए रह जाता है।
पुतिन की सिक्योरिटी किसी भी देश या उसके शेफ पर भरोसा नहीं करती है। रूस टुडे में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन का खाना मॉस्को के बाहर बने एख स्पेशल फार्म से आता है, जहां दूध देने वाली गायों की 24 घंटे निगरानी होती है।

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