शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने छोड़ा माघ मेला, बोले- ऐसी कभी कल्पना नहीं की थी

शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने माघ मेला छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी ऐसी कल्पना भी नहीं की थी। यहां उनके पहचान पर प्रश्न चिह्न खड़ा करने का प्रयास किया गया।

प्रयागराज में चल रहे माघ मेला से शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दुखी मन से विदा लेने का ऐलान किया है। बुधवार सुबह आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि वह आस्था और श्रद्धा के साथ माघ मेला में आए थे, लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि बिना स्नान किए ही लौटना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रयागराज हमेशा से शांति, विश्वास और सनातन परंपराओं की भूमि रही है और यहां से इस तरह लौटना उनके लिए बेहद पीड़ादायक है।
शंकराचार्य ने बताया कि एक ऐसी घटना घटी, जिससे उनका मन व्यथित हो गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि माघ मेला में स्नान करना उनके लिए केवल एक धार्मिक कर्म नहीं, बल्कि आस्था का विषय था। बावजूद इसके, मौजूदा हालात में उन्होंने मेला छोड़ने का कठिन निर्णय लिया। उनके इस फैसले के बाद संत समाज और श्रद्धालुओं में चर्चा तेज हो गई है।
प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद की शुरुआत 18 जनवरी को हुई, जब संगम स्नान के लिए जा रही उनकी पालकी को पुलिस ने रोक दिया। इस कार्रवाई पर शिष्यों ने विरोध जताया और कथित तौर पर धक्का-मुक्की तथा शिखा पकड़कर घसीटे जाने के आरोप सामने आए। घटना के बाद अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए और कई दिनों तक शिविर में प्रवेश नहीं किया।

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