फरवरी की पहली रात, आसमान में दिखेगा फुल मून

1 फरवरी की रात को आसमान में 'स्नो मून' अपनी पूरी चमक पर होगा। यह फरवरी का फुल मून है, जिसका नाम सदियों पहले भारी बर्फबारी के कारण पड़ा था। शाम 5:09 बजे यह अपनी अधिकतम चमक पर होगा।

आसमान को निहारना इंसान की सबसे पुरानी जिज्ञासाओं में से एक रहा है। हर पूर्णिमा की अपनी अलग पहचान होती है, लेकिन फरवरी की पूर्णिमा को खासतौर पर स्नो मून कहा जाता है। फरवरी की ठंडी रात, साफ आसमान और पूरा चमकता चंद्रमा यह नजारा देखने लायक होगा। अगर आप शहर की तेज रोशनी से दूर हैं, तो स्नो मून की चमक और भी ज्यादा साफ दिखाई देगी। इस दौरान चंद्रमा सामान्य से बड़ा और नजदीक महसूस हो सकता है, जिसे मून इल्यूजन कहा जाता है। साथ ही, कभी-कभी चंद्रमा के अंधेरे हिस्से पर हल्की रोशनी दिख सकती है, जिसे अर्थशाइन कहते हैं। ये दोनों दृश्य इस खगोलीय घटना को और खास बना देते हैं।
स्नो मून नाम के पीछे एक दिलचस्प और पुराना इतिहास छिपा है। यह नाम मॉडर्न साइंस का नहीं, बल्कि सदियों पुरानी लोक-परंपराओं से जुड़ा है। उत्तरी अमेरिका में फरवरी का महीना भारी बर्फबारी के लिए जाना जाता था। इसी कारण वहां रहने वाले लोग इस पूर्णिमा को स्नो मून कहने लगे।
1760 के दशक में एक खोजकर्ता और लेखक Jonathan Carver ने अपने यात्रा-विवरणों में इसका उल्लेख किया था। उन्होंने बताया था कि इस समय बर्फ इतनी ज्यादा होती थी कि शिकार और यात्रा करना बेहद मुश्किल हो जाता था। इसलिए लोगों ने चंद्रमा को मौसम और प्रकृति से जोड़कर नाम देना शुरू किया। इसी तरह हर महीने की पूर्णिमा के नाम रखे गए, जैसे वुल्फ मून, हार्वेस्ट मून आदि।
इसे देखने के लिए सबसे अच्छा समय सूर्यास्त के आसपास का होता है, जब चंद्रमा पूर्व दिशा से उगता है। कोशिश करें कि आप खुले स्थान पर हों जैसे छत, मैदान या गांव का इलाका जहां आसपास की रोशनी कम हो।

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