
ट्रंप ने 10% टैरिफ का ऐलान किया, लेकिन भारत को नहीं मिलेगा फायदा
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को अवैध बताते हुए रद्द करने का आदेश दिया। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने फिर दुनियाभर के तमाम देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 6-3 के बहुमत से फैसला दिया कि अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA) के तहत दुनियाभर के तमाम देशों पर डोनाल्ड ट्रंप के लगाए टैरिफ अवैध हैं, क्योंकि यह कानून राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने की स्पष्ट शक्ति नहीं देता। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से टैरिफ़ रद्द होने के बाद ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत 10 फ़ीसदी ग्लोबल टैरिफ़ लागू कर दिया है।
ट्रंप ने अदालत के फ़ैसले को “भयानक” बताया और उनकी व्यापार नीति को ख़ारिज करने वाले न्यायाधीशों को “बेवकूफ़” कहा। डोनाल्ड ट्रंप ने इसके साथ ही तुरंत दूसरा रास्ता अपनाया और ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने का आदेश जारी कर दिया।
इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने व्हाइट हाउस की ओर से पिछले साल घोषित किए गए ज़्यादातर ग्लोबल टैरिफ़ को अवैध ठहराया. 6-3 के फ़ैसले में अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने अपने अधिकारों से आगे बढ़कर फ़ैसला किया।
यह फ़ैसला उन कारोबारियों और अमेरिकी राज्यों के लिए बड़ी जीत माना जा रहा है जिन्होंने इन टैरिफ़ को चुनौती दी थी।
इससे संभावित रूप से अरबों डॉलर के टैरिफ़ रिफंड का रास्ता खुल गया है, साथ ही वैश्विक व्यापार परिदृश्य में नई अनिश्चितता भी बढ़ गई है।
शुक्रवार को व्हाइट हाउस में बोलते हुए ट्रंप ने संकेत दिया कि रिफंड बिना क़ानूनी लड़ाई के नहीं मिलेंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यह मामला वर्षों तक अदालत में उलझा रह सकता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि भारत पर टैरिफ में कोई बदलाव नहीं होगा और वे 18 प्रतिशत पर बने रहेंगे। फरवरी में भारत और अमेरिका के बीच हुए द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत अमेरिकी टैरिफ 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिए गए थे। बदले में भारत ने कुछ बाजार पहुंच छूट और व्यापार बाधाओं में समायोजन किया, लेकिन कृषि, डेयरी और डिजिटल सेवाओं जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बरकरार रखी।

