
भारत के के लिए चीन आया ‘K वीजा’, कितना लुभायेगा यह भारतीय पेशेवरों को
ट्रंप ₹88 लाख में H-1B वीजा बेच रहे तो वहीं चीन भारत के टैलेंट को साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में युवा टैलेंट्स के लिए एक नई वीजा कैटेगरी की घोषणा कर दी है. चीन अपने मौजूदा वीजा कैटेगरी में 'K Visa' जोड़ रहा है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H- 1B वीजा के लिए 100,000 डॉलर (लगभग 88 लाख रुपए) की फीस तय कर दी है. अमेरिका के इस फैसल ने भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है और चीन ने इसे आपदा में अवसर का मौका बना लिया है. अब चीन ने साइंस और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में युवा टैलेंट को लुभाकर अपने यहां लाने के लिए एक नई वीजा कैटेगरी की घोषणा कर दी है. चीन अपने मौजूदा वीजा कैटेगरी में ‘K Visa’ जोड़ रहा है, जो योग्य युवा विज्ञान और प्रौद्योगिकी पेशेवरों (प्रोफेशनल्स) के लिए उपलब्ध है.
अमेरिका के H- 1B वीजा को सबसे बड़े पैमाने पर भारत के पेशेवरों द्वारा इस्तेमाल किया जाता था. अब जब ट्रंप ने इस वीजा की फीस को हद से ज्यादा महंगा बना दिया है, चीन उन्हें अपनी तरफ करने की कोशिश करता दिख रहा है.
चीन अभी मौजूदा वक्त में 12 सामान्य वीजा जारी करता है. इन के प्रकारों की तुलना में, K वीज़ा धारकों को अनुमति वाली एंट्री की संख्या, वीजा की वैधता अवधि (वैलिडिटी पीरियड) और रहने की अवधि के मामले में अधिक सुविधा प्रदान करेगा.
चीन में आने के बाद, K Visa रखने वालों को शिक्षा, संस्कृति और विज्ञान और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों के साथ-साथ एंटरप्रेन्योरशिप और व्यावसायिक गतिविधियों में किसी में आने जाने, फिल्ड बदलने की अनुमति दी जाएगी.
चीन की सरकार ने एक बयान में कहा कि देश के विकास के लिए दुनिया भर की प्रतिभाओं की भागीदारी की आवश्यकता है और चीन का विकास उनके लिए अवसर भी प्रदान करता है.

