गोरखपुर में रात को गांवों के ऊपर उड़ते ड्रोन, पशु तस्करी और चोरी का डर

गोरखपुर के कई ग्रामीण इलाकों में रात को उड़ते ड्रोन ने लोगों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीण पशु तस्करी और चोरी की आशंका से पहरा दे रहे हैं। पुलिस-प्रशासन जांच में जुटा है, लेकिन अब तक ड्रोन ऑपरेटर और उनके मकसद का पता नहीं चला। बड़हलगंज, गोला, चौरीचौरा समेत कई क्षेत्रों में दहशत है। DIG और SSP ने टीमों को अलर्ट किया है। नियमों के मुताबिक बिना अनुमति ड्रोन उड़ाना प्रतिबंधित है, लेकिन संदिग्ध गतिविधियों से सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

आयाम स्वरूप, गोरखपुर| गोरखपुर के ग्रामीण इलाकों में रहस्यमयी ड्रोन उड़ने से दहशत का माहौल है। रात होते ही आसमान में मंडराते इन ड्रोन ने लोगों की नींद उड़ा दी है। ग्रामीण रातभर जागकर पहरा दे रहे हैं। पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन अब तक ड्रोन के ऑपरेटर और मकसद का पता नहीं चल पाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि ड्रोन कभी खेतों के ऊपर मंडराता है, तो कभी आबादी वाले हिस्से पर देर तक घूमता रहता है। लोगों को आशंका है कि यह ड्रोन पशु तस्करों या चोरों द्वारा गांव की रेकी करने के लिए उड़ाए जा रहे हैं। कई बार सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची, मगर अब तक कुछ हाथ नहीं लगा। बड़हलगंज, गोला, पीपीगंज, खोराबार, चौरीचौरा और सहजनवा क्षेत्र के गांवों में लोग लगातार रातभर पहरा दे रहे हैं।

ग्रामीणों की चिंता
गांववालों का कहना है कि अगर अपराधी कैमरे से गतिविधियां रिकॉर्ड कर रहे हैं तो यह सीधा कानून-व्यवस्था पर हमला है। महिलाएं और बच्चे अंधेरा होने के बाद घर से बाहर निकलने में डर महसूस कर रहे हैं।

पुलिस और प्रशासन की सख्ती
एसएसपी राजकरन नय्यर ने सभी थानों को अलर्ट किया है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि ड्रोन की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंचे और ग्रामीणों का भरोसा बनाए। वहीं डीआइजी डॉ. एस. चनप्पा ने कहा कि गांवों के ऊपर उड़ने वाले ड्रोन की घटनाओं की हर स्तर से जांच की जा रही है।

अपराधियों की नई चाल?
स्थानीय लोगों को आशंका है कि ड्रोन के जरिए पशु तस्करी के रूट चिन्हित किए जा रहे हैं या फिर चोरी-डकैती से पहले गांव की रेकी हो रही है। यह भी माना जा रहा है कि अपराधी पुलिस की गश्त और गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ड्रोन की उड़ान क्षमता
छोटे ड्रोन: 20-30 मिनट तक उड़ सकते हैं और 2-3 किमी दूरी तक जाते हैं।
हाई-रेंज ड्रोन: 5-7 किमी तक उड़ान भरते हैं, नाइट विजन कैमरा और जीपीएस से लैस होते हैं।
कई ड्रोन बिना आवाज के भी उड़ते हैं, जिससे पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो जाता है।

बचाव के उपाय
ड्रोन दिखते ही तुरंत 112 या नजदीकी थाने पर सूचना दें।
घर और पशुशाला के पास सीसीटीवी कैमरे लगवाएं।
रात में घरों और रास्तों पर रोशनी बढ़ाएं।
अफवाह न फैलाएं, लेकिन संदिग्ध गतिविधियों को नजरअंदाज भी न करें।

जिले में लागू है ड्रोन नियमावली
गोरखपुर में बिना अनुमति ड्रोन उड़ाना प्रतिबंधित है। साल 2023 में लागू हुई ड्रोन पॉलिसी के तहत शहर को तीन जोनों—रेड, येलो और ग्रीन—में बांटा गया है।

रेड जोन: एयरफोर्स स्टेशन, एयरपोर्ट और आवासी क्षेत्र, जहां ड्रोन उड़ाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
येलो जोन: 12 किमी परिधि में ड्रोन उड़ाने के लिए एसएसपी कार्यालय से अनुमति लेनी होगी।
रजिस्ट्रेशन जरूरी: ड्रोन रखने वालों को डीजीसीए पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। थाना स्तर पर भी ड्रोन की निगरानी की व्यवस्था की गई है।

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