मेरिट में आगे तो जनरल कैटेगरी की नौकरी में भी SC/ST/OBC का हक

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आवेदन पत्र में आरक्षित श्रेणी का उल्लेख कर देना, किसी उम्मीदवार को स्वतः आरक्षित पद पर नियुक्ति का हक नहीं देता है. उसी तरह यदि कोई आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार बिना रियायत के सामान्य वर्ग से बेहतर प्रदर्शन करता है तो उसे ओपन कैटेगरी में ही प्रतिस्पर्धा का अधिकार है.

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा है, जिसमें कहा गया था कि आरक्षित वर्ग के वे अभ्यर्थी जो सामान्य (जनरल/ओपन) श्रेणी की कट-ऑफ से अधिक अंक हासिल करते हैं, उन्हें शॉर्टलिस्टिंग के चरण में ही ओपन कैटेगरी में माना जाना चाहिए न कि केवल उनकी आरक्षित श्रेणी तक सीमित रखा जाए। जस्टिस दीपांकर दत्ता और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने राजस्थान हाई कोर्ट प्रशासन और उसके रजिस्ट्रार द्वारा दायर अपीलों को खारिज करते हुए 18 सितंबर 2023 के डिवीजन बेंच के फैसले की पुष्टि की।
सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ताओं की इस दलील को खारिज कर दिया कि इससे आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को “डबल बेनिफिट” मिल जाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनरल या ओपन कैटेगरी कोई आरक्षित कोटा नहीं है, यह सभी उम्मीदवारों के लिए केवल मेरिट के आधार पर खुली होती है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को आरक्षण की श्रेणी में आने वाले मेधावी उम्मीदवारों की बड़ी जीत माना जा रहा है। इस फैसले के साथ ही सरकारी नौकरियों में सामान्य श्रेणी की सीटों का मतलब भी नए सिरे से परिभाषित हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला राजस्थान हाई कोर्ट की ओर से दायर मामले में सुनाया है, जिसमें एक भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में यह नियम निर्धारित किया गया था कि रिजर्व कैटेगरी के उम्मीदवारों को जनरल कैटेगरी की सीटों पर नियुक्त नहीं किया जाएगा, चाहे उनके अंक जनरल कट-ऑफ से अधिक क्यों न हों।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button