
महान शिक्षाविद एवं एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान का 17 अक्टूबर को मनाया जाएगा जन्मदिन
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की 208वीं जयंती आज सर सैयद डे रूप में मनाया जाएगा।
गोरखपुर में सर सैयद डे मनाने की परंपरा कई साल पुरानी है। यहाँ के वरिष्ठ अलीग डॉ. अज़ीज़ अहमद की नेतृत्व में हमेशा अलीग़ बिरादरी अपने बुज़ुर्गों के नक़्श-ए-कदम पर चलती आई है, और आज के युवा भी उसी जोश और लगन से इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। गोरखपुर का यह नज़ारा दिल को सुकून देता है – जहाँ एक छोटे से शहर में भी अलीग बिरादरी मोहब्बत, तहज़ीब और तालीम का परचम बुलंद रखते हुए सर सैयद अहमद ख़ाँ के मिशन को ज़िंदा रखे हुए है।
वास्तव में, सर सैयद डे कोई एक दिन नहीं, बल्कि एक सोच, एक किरदार और एक नए इल्मी शऊर की ताज़गी का नाम है। अलीग्स वेलफेयर एसोसियेशन (GAWA) के तात्वधान में हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी महान शिक्षाविद् एवं अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान का जन्मोत्सव, सर सय्यद डे, 17 अक्टूबर 2025 को शाम 7:30 बजे जश्न महल मैरेज हाउस, निजामपुर, गोरखपुर में मनाया जाएगा।
गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान अध्यक्ष नुसरत अब्बासी ने बताया कि इस वर्ष इन्टीग्रल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. जावेद मुर्सरत को मुख्य अतिथि, एयर वाईस मार्शल (रि०) डा. देवेश वत्स और आई.पी.एस. (रि०) डा. शान्तनु मुखर्जी को विशिष्ट अतिथि बनाया गया है।
यह कार्यक्रम गोरखपुर मण्डल के रहने वाले अलीग्स (अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के पूर्व और वर्तमान छात्र) के लिए चिंतन, सामाजिक सोच और कार्यों का महत्वपूर्ण मंच है, जिसे सभी बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाते हैं। इसे कुछ लोग “ईदे अलीग” भी कहते हैं।
इस वर्ष कार्यक्रम में गोरखपुर मण्डल के लगभग 300 अलीग्स शामिल हो सकते है। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय का तराना प्रस्तुत किया जाएगा, जो सभी अलीग्स के लिए एक अनूठा अनुभव होगा और उन्हें उनके सामाजिक और शैक्षिक कार्यों को बेहतर ढंग से अंजाम देने की दिशा देगा।
“यह मौका सिर्फ़ एक कार्यक्रम का नहीं बल्कि अलीग बिरादरी की तहज़ीब, इल्मी शायस्तगी और आपसी मोहब्बत का खूबसूरत इज़हार है। गोरखपुर में बुज़ुर्गों से लेकर नौजवानों, शिक्षकों से लेकर छात्रों तक, सब इस आयोजन की तैयारी में दिलचस्पी के साथ हिस्सा ले रहे हैं। सर सैयद डे सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि यह दिन हमें तालीम, तहज़ीब और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़ की उस राह की याद दिलाता है, जिसे सर सैयद अहमद ख़ाँ ने हमारे लिए रोशन किया।”
कार्यक्रम में सर सैयद की तालीमी सेवाओं पर रोशनी डाली जाएगी, तक़रीरें, नज़्में, ग़ज़लें और डॉक्यूमेंट्री की प्रस्तुति होगी। अंत में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के मशहूर तराने –
“ये मेरा चमन, ये मेरा चमन, मैं अपने चमन का बुलबुल हूँ”
– को म्यूज़िकल परफॉर्मेंस के रूप में पेश किया जाएगा।

