गृहणियां भी राष्ट्रा निर्माता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने सड़क हादसों में जान गंवाने वाली गृहिणियों के मुआवजे पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया है

*गृहिणियों के काम की आर्थिक क़ीमत को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि घरेलू काम और परिवार की देखभाल की क़ीमत 30 हजार रुपये महीना होनी चाहिए.* सुप्रीम कोर्ट ने यह महत्वपूर्ण आदेश एक व्यक्ति की पत्नी के रोड एक्सीडेंट में मौत हो जाने के मामले में दिया है. कोर्ट ने इसी आधार पर पीड़ित को अतिरिक्त हर्ज़ाना देने का आदेश दिया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताब़िक, सुप्रीम कोर्ट के दो जजों की पीठ ने आदेश में कहा, ” *हमारा यह भी मानना है कि गृहिणी मानवीयता और देश के विकास में योगदान देती हैं. वो राष्ट्र का निर्माण करती हैं इसलिए हमने इसके लिए सिद्धांत तय किए हैं* .” अदालत ने कहा, “एक राष्ट्र निर्माता के रूप में हमने गृहिणी की भूमिका को मानते हुए घरेलू देखभाल की न्यूनतम क़ीमत 30 हज़ार रुपये प्रति माह तय की है.”

इन मामलों में अब तक देश की अदालतें और एक्सीडेंट ट्रिब्यूनल किसी हादसे में जान गंवाने वाली गृहिणियों का मुआवजा तय करने के लिए एक ‘काल्पनिक आय’ मानती थीं। इसके लिए राज्य के न्यूनतम वेतन को आधार बनाया जाता था, जो कि बहुत कम होता था.

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