गोरखपुर में 622 एकड़ में विकसित होगी वैदिक सिटी, GDA अपनाएगा लैंड पुलिंग मॉडल

गोरखपुर में कुशीनगर रोड पर 622 एकड़ में वैदिक सिटी विकसित की जाएगी। Gorakhpur Development Authority किसानों से जमीन लेने के लिए लैंड पुलिंग और अर्जन दोनों विकल्प अपनाएगा। परियोजना में वैदिक थीम पर रेडियल रोड नेटवर्क, सोलर सुविधाएं, सार्वजनिक परिवहन, नक्षत्र उद्यान और हस्तशिल्प केंद्र बनाए जाएंगे। GDA उपाध्यक्ष Abhinav Gopal ने स्थल का निरीक्षण कर इसे गोरखपुर के आधुनिक और सांस्कृतिक विकास की बड़ी योजना बताया।

आयाम स्वरूप, गोरखपुर

गोरखपुर में “नया गोरखपुर” परियोजना के तहत शहर के पूर्वोत्तर दिशा में कुशीनगर रोड पर वैदिक सिटी विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। मंगलवार को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) के उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने प्रस्तावित परियोजना स्थल का निरीक्षण किया। यह महत्वाकांक्षी परियोजना करीब 622 एकड़ भूमि पर विकसित की जाएगी।

वैदिक सिटी के लिए चौरीचौरा तहसील के माड़ापार गांव और सदर तहसील के तकिया मेदनीपुर व कोनी गांव में जमीन चिह्नित की गई है। परियोजना के लिए किसानों से बातचीत के साथ-साथ अनिवार्य भूमि अर्जन की प्रक्रिया भी अपनाई जा रही है। इसके अलावा GDA अब लैंड पुलिंग मॉडल के जरिए भी जमीन लेने की तैयारी कर रहा है।

तीन गांवों में ली जाएगी जमीन

निरीक्षण के दौरान GDA उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल के साथ प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह भी मौजूद रहे। प्राधिकरण की ओर से अनिवार्य अर्जन का प्रस्ताव शासन को पहले ही भेजा जा चुका है। हालांकि GDA की कोशिश है कि किसानों से सहमति बनाकर प्रक्रिया को तेजी से पूरा किया जाए।

लैंड पुलिंग मॉडल के तहत किसानों की जमीन विकसित करने के बाद उसका लगभग एक चौथाई हिस्सा वापस किसानों को उपयोग के लिए दिया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यह मॉडल किसानों के लिए बेहतर विकल्प साबित हो सकता है।

वैदिक सिटी के लिए चिह्नित भूमि में—

  • माड़ापार में 373.62 एकड़,
  • तकिया मेदनीपुर में करीब 109 एकड़,
  • और कोनी में लगभग 140 एकड़ जमीन शामिल है।

वैदिक अवधारणा पर आधारित होगी सिटी

मुख्यमंत्री शहरी विस्तार योजना के तहत विकसित होने वाली यह परियोजना भारतीय परंपरा और आधुनिक शहरी ढांचे का मिश्रण होगी। इसकी सबसे बड़ी खासियत रेडियल यानी वृत्तीय प्लानिंग मॉडल होगा, जो वैदिक अवधारणा “नंद्यावर्त” से प्रेरित है।

इस मॉडल के तहत शहर के केंद्र से चारों दिशाओं में सड़कें विकसित की जाएंगी, जिससे यातायात आसान होगा और लोगों को कम दूरी तय करनी पड़ेगी।

सार्वजनिक परिवहन और ग्रीन एनर्जी पर रहेगा जोर

वैदिक सिटी में सार्वजनिक परिवहन और पैदल आवागमन को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है। निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने के लिए प्रोत्साहन आधारित सुविधाएं देने पर भी विचार किया जा रहा है।

इसके तहत रूफटॉप सोलर पैनल लगाने वालों को बिजली क्रेडिट जैसे लाभ दिए जा सकते हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास को ध्यान में रखते हुए शहर को ग्रीन और स्मार्ट मॉडल पर विकसित किया जाएगा।

वैदिक उद्यान और हस्तशिल्प क्षेत्र भी बनेंगे

परियोजना के तहत वैदिक (नक्षत्र) उद्यान, औषधीय पौधों की प्रदर्शनी, पौधशाला और वैदिक ज्ञान पर आधारित वैश्विक विचार केंद्र विकसित करने की भी योजना है।

इसके अलावा गोरखपुर, नेपाल और आसपास के क्षेत्रों के हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों के लिए विशेष क्षेत्र विकसित किए जाएंगे, जिससे स्थानीय कारीगरों को बाजार और पहचान मिल सके।

GDA उपाध्यक्ष ने क्या कहा

GDA उपाध्यक्ष अभिनव गोपाल ने कहा कि “नया गोरखपुर” परियोजना के लिए जल्द भूमि उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लैंड पुलिंग मॉडल पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि वैदिक सिटी गोरखपुर के शहरी विकास को नई दिशा देने के साथ राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने की क्षमता रखती है। यह परियोजना आधुनिक सुविधाओं के साथ भारतीय संस्कृति और वैदिक परंपराओं को भी जीवंत बनाए रखेगी।

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