
डीडीयू: अब लॉ डिपार्टमेंट से कर सकेंगे पीएचडी
डीडीयू यूनिवर्सिटी में उच्च शोध उपाधियों के क्षेत्र में लगभग 40 वर्ष बाद नया अध्यादेश 2025 लागू कर दिया है। इस अध्यादेश के बाद डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डीलिट), डॉक्टर ऑफ साइंस (डीएससी) और डॉक्टर ऑफ लॉज (एलएलडी) की डिग्रियों को स्वीकृत व लागू किया गया है।
डीडीयू यूनिवर्सिटी उच्च शोध उपाधियों के क्षेत्र में लगभग 40 वर्ष बाद नया अध्यादेश 2025 लागू कर दिया है। इस अध्यादेश के बाद डॉक्टर ऑफ लिटरेचर (डीलिट), डॉक्टर ऑफ साइंस (डीएससी) और डॉक्टर ऑफ लॉज (एलएलडी) की डिग्रियों को स्वीकृत व लागू किया गया है। यह पुराने 1985 के अध्यादेश को हटाकर एक विस्तृत पारदर्शी और अंतरराष्ट्रीय मानकों पर आधारित ढांचे को लागू किया है। जो राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की ओर से उत्तर प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1973 के अंतर्गत स्वीकृति दी गई है।
अब तक 1985 के अध्यादेश में यूनिवर्सिटी में केवल डीलिट और डीएससी की ही व्यवस्था थी, इस अध्यादेश के बाद 2025 में पहली बार एलएलडी को शामिल किया गया है। इससे विधि विषय में उच्च स्तर के शोध, अकादमिक उत्कृष्टता और नवाचार को नया प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। यह बदलाव यूनिवर्सिटी के लिए एक बड़ा शैक्षणिक विस्तार माना जा रहा है।
पहली बार प्रवेश प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। उम्मीदवार को विस्तृत बायोडाटा, 1500–3000 शब्द का शोध-सार, 1000 शब्द का पूर्व शोध-विवरण और सभी प्रकाशित शोध-पत्रों के प्रमाण पत्र जमा करने होंगे। साथ ही यूजीसी प्लेज़रिज़्म नियम 2018 का पालन अनिवार्य होगा।
नए अध्यादेश के अनुसार डीलिट, डीएससी व एलएलडी में प्रवेश और मूल्यांकन की निगरानी एक उच्च स्तरीय पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्च कमेटी का गठन किया जाएगा। इस समिति में अध्यक्ष कुलपति व संबंधित संकाय के डीन, एचओडी और दो विशेषज्ञ प्रोफेसर सदस्य होंगे। यह समिति शोध की गुणवत्ता, दिशा और अंतिम मूल्यांकन की निर्णायक संस्था होगी। इसमें पहली बार शोध कार्यक्रम की अवधि न्यूनतम दो वर्ष और अधिकतम चार वर्ष निर्धारित की गई है। इसके लिए प्रति वर्ष रजिस्ट्रेशन को रेनुअल करना जरूरी होगा। पहली बार प्री-सबमिशन सेमिनार और प्लेजरिज़्म चेक को भी अनिवार्य किया गया है। शोधप्रबंध हिंदी या अंग्रेजी दोनों लैग्वेज में प्रस्तुत किया जा सकेगा, यह सुविधा पहले उपलब्ध नहीं थी।
लगभग 40 वर्षों बाद यह संशोधित अध्यादेश हमारे विश्वविद्यालय के लिए एक ऐतिहासिक बदलाव है। डीलिट, डीएससी व एलएलडी की डिग्रियों के लिए अब एक स्पष्ट, पारदर्शी, कठोर और अंतरराष्ट्रीय मानकों वाला ढांचा तैयार हो चुका है। पहली बार एलएलडी की डिग्री शामिल करके हमने विधि क्षेत्र के शोध को भी नई दिशा दी है। यह सुधार राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के मार्गदर्शन और समयबद्ध अनुमोदन के कारण संभव हो सका है। यह अध्यादेश शोध की गुणवत्ता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और यूनिवर्सिटी की राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा को ऊंचाई देने में अहम भूमिका निभाएगा।

