पूर्व मंत्री राजा भैया और उनकी साली को हाई कोर्ट का नोटिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने राजा भैया की पत्नी भानवी कुमारी सिंह के खिलाफ मानहानि मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी। कोर्ट ने इसे पारिवारिक विवाद बताते हुए मध्यस्थता की संभावना जताई है और राजा भैया एवं साध्वी सिंह को नोटिस जारी किया है।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने पूर्व मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और उनकी साली साध्वी सिंह को पत्नी भानवी कुमारी सिंह द्वारा दायर एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। अदालत ने साथ ही मानहानि के मामले में भानवी के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
न्यायमूर्ति सौरभ लावनिया की पीठ ने भानवी द्वारा दायर एक याचिका पर यह आदेश दिया। इसमें लखनऊ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) की अदालत में चल रही आपराधिक कार्यवाही को चुनौती दी गई थी। अदालत ने राजा भैया और साध्वी सिंह को दो हफ्ते के अंदर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया और मामले की अगली सुनवाई तीन हफ्ते बाद नियत की।
यह मामला साध्वी सिंह द्वारा चार सितंबर 2023 को हजरतगंज कोतवाली में दर्ज कराये गये मुकदमे से संबंधित है। इसमें मानहानि का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने बाद में आरोप पत्र दाखिल किया, जिसके बाद सीजेएम ने संज्ञान लिया और भानवी को समन जारी किया। भानवी के वकील ने दलील दी कि कथित अपराधों की प्रकृति को देखते हुए मजिस्ट्रेट के सामने सिर्फ़ एक शिकायती मामला दायर किया जा सकता था और मुकदमा दर्ज कराने और जांच की अनुमति नहीं थी। अदालत को यह भी बताया गया कि याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता बहनें हैं।
याचिका के अनुसार राजा भैया ने 14 नवंबर 2022 को भानवी के खिलाफ शादी खत्म करने के लिए एक मुकदमा दायर किया था, जिसका भानवी ने जवाब दिया था। साध्वी ने आरोप लगाया था कि उस जवाब में दिए गए कुछ बयान मानहानिकारक थे जिनके आधार पर यह मुकदमा दर्ज किया गया। अदालत को यह भी बताया गया कि भानवी ने साध्वी के खिलाफ कैंट इलाके में ‘रामायण’ नाम की एक सम्पत्ति के संबंध में स्थायी रोक लगाने के लिए एक अलग मुकदमा दायर किया है। अदालत ने यह देखते हुए कि विवाद दो बहनों के बीच था और इसे मध्यस्थता से सुलझाया जा सकता है, कहा कि मामले पर विचार करने की जरूरत है और इसलिए अगले आदेश तक भानवी के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही पर रोक लगा दी।

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