गोरखपुर नगर निगम सदन में पार्षदों का हंगामा, अधिकारियों की देरी और अव्यवस्था पर जताई नाराजगी

गोरखपुर नगर निगम सदन की बैठक शुरू होने से पहले ही विवाद हो गया। अधिकारियों के देर से पहुंचने पर पार्षदों ने नाराजगी जताते हुए इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान बताया। “सम्भव” कार्यक्रम के कारण देरी, पूर्व नगर आयुक्त के विदाई समारोह में सूचना न देने और पूर्व पार्षद रोजा खातून के निधन पर मिनट्स जारी न होने को लेकर भी हंगामा हुआ। अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने गलती मानते हुए खेद जताया, जिसके बाद सदन स्थगित कर दिया गया।

आयाम स्वरूप, गोरखपुर

गोरखपुर नगर निगम का सदन मंगलवार को शुरू होने से पहले ही विवादों में घिर गया। सुबह 11 बजे निर्धारित बैठक करीब आधे घंटे की देरी से शुरू हुई, जिसके बाद पार्षदों का गुस्सा फूट पड़ा। अधिकारियों के देर से सदन हाल पहुंचने पर पार्षदों ने जमकर हंगामा किया और इसे जनप्रतिनिधियों का अपमान बताया।

आधे घंटे तक अधिकारियों का इंतजार करते रहे पार्षद

सदन में मौजूद पार्षद करीब 30 मिनट तक अधिकारियों का इंतजार करते रहे। जैसे ही अधिकारी सदन में पहुंचे, पार्षदों ने एकजुट होकर विरोध शुरू कर दिया। उनका कहना था कि जब सभी जनप्रतिनिधि समय से पहुंच सकते हैं, तो अधिकारियों को भी समय का पालन करना चाहिए।

पार्षदों ने आरोप लगाया कि इस तरह की लापरवाही से सदन की गरिमा प्रभावित होती है और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को ठेस पहुंचती है।

“अपमान के बल पर सदन नहीं चलेगा”

विरोध के दौरान पार्षद रवींद्र सिंह ने नाराजगी जताते हुए कहा कि “अपमान के बल पर सदन नहीं चलेगा।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अधिकारियों का यही रवैया जारी रहा तो भविष्य में सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना मुश्किल हो जाएगा।

“सम्भव” कार्यक्रम को लेकर भी उठा विवाद

सदन में “सम्भव” कार्यक्रम को लेकर भी सवाल उठे। पार्षदों ने कहा कि हर मंगलवार को आयोजित होने वाला यह कार्यक्रम उसी समय नीचे सभागार में चल रहा था, जबकि ऊपर सदन की बैठक बुलाई गई थी।

पार्षदों का आरोप था कि अधिकारी “सम्भव” कार्यक्रम में व्यस्त रहे, जिसकी वजह से वे सदन में देर से पहुंचे। उन्होंने इसे प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि जब सदन की बैठक पहले से तय थी, तो अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित की जानी चाहिए थी।

पूर्व नगर आयुक्त के विदाई समारोह पर भी नाराजगी

पूर्व नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के विदाई समारोह को लेकर भी सदन में नाराजगी देखने को मिली। कई पार्षदों ने कहा कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी ही नहीं दी गई, जिसके कारण आधे से अधिक पार्षद समारोह में शामिल नहीं हो सके।

पार्षदों ने इसे जनप्रतिनिधियों की अनदेखी बताते हुए नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और कहा कि व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी साफ दिखाई दे रही है।

रोजा खातून के निधन के बाद मिनट्स जारी न होने पर उठे सवाल

पूर्व पार्षद रोजा खातून के निधन के बाद सदन के मिनट्स जारी न किए जाने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा। पार्षदों ने इसे असंवेदनशीलता बताते हुए कहा कि किसी जनप्रतिनिधि के निधन के बाद यह जरूरी औपचारिकता होती है, जिसे नजरअंदाज किया गया।

अपर नगर आयुक्त ने मानी गलती

लगातार बढ़ते विरोध के बीच अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार ने स्थिति संभालने की कोशिश की। उन्होंने नगर निगम की ओर से हुई चूक स्वीकार करते हुए सदन में खेद जताया और भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनने दी जाएगी।

हंगामे के बीच स्थगित हुई बैठक

हालांकि, पार्षदों का गुस्सा पूरी तरह शांत नहीं हुआ और माहौल काफी गरमा गया। इसके बाद पूर्व पार्षद रोजा खातून की आत्मा की शांति के लिए सदन में दो मिनट का मौन रखा गया। मौन के बाद बैठक को स्थगित कर दिया गया।

इस तरह कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने से पहले ही नगर निगम सदन की कार्यवाही समाप्त हो गई।

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