
77वे गणतंत्र दिवस पर यूरोपीय संघ के नेता होंगे मुख्य अतिथि
भारत में गणतंत्र दिवस पर विदेशी मुख्य अतिथि को बुलाने की परंपरा 1950 से चली आ रही है। पहले चीफ गेस्ट इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो थे।
भारत में 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही गणतंत्र दिवस मनाने की शुरुआत हुई। उसी साल से गणतंत्र दिवस पर किसी विदेशी नेता को मुख्य अतिथि (Chief Guest) के रूप में बुलाने की परंपरा शुरू हुई। इसका उद्देश्य भारत की विदेश नीति, अंतरराष्ट्रीय मित्रता और कूटनीतिक रिश्तों को दुनिया के सामने दर्शाना था।
इस वर्ष भारत ने अपने 77वां गणतंत्र दिवस के लिए यूरोपियन यूनियन के दो चीफ गेस्ट का चयन किया है। इस साल चीप गेस्ट के रूप में यूरोपीय संघ के उर्सुला वॉन डेर लेयेन और एंटोनियो कोस्टा को न्योता दिया है। उर्सुला वॉन डेर लेयेन का परिचय यह है कि वह यूरोपियन कमीशन के प्रेसिडेंट हैं और यूरोपियन यूनियन की पॉलिसी एवं उससे संबंधित कामकाम को संभालते हैं। इसके साथ ही एंटोनियो कोस्टा यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट हैं और वह (EU) की समिट्स की अध्यक्षता करते हैं।
अब तक अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, दक्षिण अफ्रीका जैसे कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रधानमंत्री भारत के गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बन चुके हैं। कई बार एक से अधिक देशों के नेता भी एक साथ आमंत्रित किए गए हैं।
गणतंत्र दिवस का चीफ गेस्ट केवल सम्मान नहीं, बल्कि भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं को दिखाता है। जिस देश के साथ भारत अपने रिश्ते मजबूत करना चाहता है, अक्सर उसी देश के नेता को मुख्य अतिथि बनाया जाता है। यह भारत की डिप्लोमैसी ऑन डिस्प्ले मानी जाती है।

