यूपी के 3.53 लाख लोगों को वापस होंगे 127 करोड़ रुपये बिजली के बिल

उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए उपभोक्ताओं से अधिक वसूली गई 127.85 करोड़ रुपये की राशि वापस करने का आदेश दिया है।

नये बिजली कनेक्शन के लिए स्मार्ट प्रीपेड मीटर के एवज में पिछले वर्ष उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूली गई धनराशि अब बिजली कंपनियों को वापस करनी पड़ेगी। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने बिजली कंपनियों को आदेश दिया है कि मीटर के लिए 3.53 लाख उपभोक्ताओं से ज्यादा वसूले गए लगभग 127.85 करोड़ रुपये अप्रैल से जुलाई के दरमियान उनके बिजली के बिल में समायोजित किए जाएं।

कारपोरेशन प्रबंधन द्वारा बिना अनुमति स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत तय करने पर आयोग ने कड़ा रुख दिखाते हुए 31 जुलाई तक समायोजन की विस्तृत रिपोर्ट मांगने के साथ ही 11 अगस्त को कारपोरेशन के निदेशक वाणिज्य को भी व्यक्तिगत तौर पर तलब किया है।

आयोग द्वारा नई कास्ट डाटा बुक (बिजली के उपकरणों की कीमत संबंधी सूची) लागू करने से पहले ही कारपोरेशन प्रबंधन ने पिछले वर्ष अपने स्तर से सिंगल फेज बिजली कनेक्शन के मामले में स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए 6016 रुपये जबकि थ्री फेज के लिए 11,341 रुपये वसूलने का आदेश नौ सितंबर को कर दिया था।

इस बीच 31 दिसंबर से लागू नई कास्ट डाटा बुक में सिंगल फेज स्मार्ट प्रीपेड मीटर की कीमत 2800 रुपये और थ्री फेज के लिए 4100 रुपये तय की गई है। ऐसे में 31 दिसंबर से पहले दिए दिए 3,53,357 नये कनेक्शन पर 3216 (सिंगल फेज) से 7241(थ्री फेज) रुपये ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए वसूले गए हैं।

उपभोक्ता परिषद की याचिका पर कारपोरेशन प्रबंधन से जवाब-तलब करने के बाद आयोग द्वारा अब दिए गए अहम आदेश में कहा गया है कि उपभोक्ताओं से स्मार्ट प्रीपेड मीटर के लिए तय दर से ज्यादा वसूली गई धनराशि को एक अप्रैल से 31 जुलाई तक के बिजली के बिल में समायोजित किया जाए।

इसमें किसी तरह की हीलाहवाली न हो सके इसके लिए आयोग ने समायोजन की पूरी रिपोर्ट भी कारपोरेशन प्रबंधन से मांगी है। याचिका पर 11 अगस्त को सुनवाई के दौरान आयोग ने कारपोरेशन के निदेशक (वाणिज्य) को भी व्यक्तिगत तौर पर उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं।

परिषद अध्यक्ष वर्मा का कहना है कि कुल कनेक्शन में लगभग 10 प्रतिशत थ्री फेज कनेक्शन होंगे। इस तरह से बिजली कंपनियों को लगभग 127.85 करोड़ रुपये उपभोक्ताओं को वापस करने पड़ेंगे। वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं के हित में आयोग द्वारा बनाए गए नियम व कानूनों का भविष्य में फिर उल्लंघन न हो इसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों और बिजली कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई भी की जाए।

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