पंच प्रण से विकसित भारत का संकल्प: गोरखपुर में योगी आदित्यनाथ का संबोधन

गोरखपुर में “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश 2047” कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश को फिर से विभाजन से बचाने और प्रधानमंत्री के पंच प्रण अपनाने की अपील की. उन्होंने भारत की ऐतिहासिक आर्थिक ताकत, गुलामी से आई गिरावट, यूपी की उर्वरा क्षमता, ODOP योजना, नागरिक कर्तव्यों और विधानसभा में 24 घंटे हुई चर्चा पर जोर दिया.

आयाम स्वरूप, गोरखपुर। गोरखपुर स्थित गोरखनाथ विश्वविद्यालय में रविवार को आयोजित “विकसित भारत–विकसित उत्तर प्रदेश 2047” कार्यशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देश के विकास, इतिहास और नागरिक कर्तव्यों पर विस्तृत संबोधन दिया। उन्होंने कहा कि भारत कभी “सोने की चिड़िया” कहलाता था, लेकिन आंतरिक विभाजन ने देश को गुलामी की ओर धकेला. उन्होंने जोर दिया कि अब हमें किसी भी तरह से फिर से विभाजित नहीं होना है.
योगी ने प्रधानमंत्री द्वारा सुझाए गए पंच प्रण को दोहराते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना पूरा करने के लिए हर नागरिक को पाँच संकल्प लेने होंगे—गुलामी की मानसिकता समाप्त करना, हीन भावना मिटाना, अपनी विरासत का सम्मान करना, सेना और जवानों के प्रति सम्मान का भाव रखना और नागरिक कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना.
उन्होंने बताया कि 17वीं सदी तक भारत कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में विश्व में नंबर एक था. उस समय आधी आबादी कृषि पर आधारित थी और शेष लोग विभिन्न हुनर और औद्योगिक कार्यों में जुटे थे. दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 25% थी. लेकिन 1800 ईस्वी तक ब्रिटिश शासन के दौरान उद्योग धीरे-धीरे बंद होते गए और लोग कृषि पर निर्भर हो गए. परिणामस्वरूप आपूर्ति अधिक और मांग कम होने से आर्थिक संतुलन बिगड़ा, भुखमरी और बीमारियों ने देश को जकड़ लिया. 1947 तक भारत की वैश्विक अर्थव्यवस्था में हिस्सेदारी मात्र 3% रह गई और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में भी हम पिछड़ गए.
मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की ऐतिहासिक और भौगोलिक ताकत पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि यूपी देश का हृदय स्थल है, जहां सबसे अधिक आबादी और सबसे उपजाऊ भूमि मौजूद है. पश्चिम से बलिया तक फैला समतल क्षेत्र दुनिया में दुर्लभ है. 1947 में राज्य का भारत की अर्थव्यवस्था में 14% योगदान था, जो 1960 तक जारी रहा, लेकिन बाद में गिरावट आई. 2017 में सत्ता संभालने पर उन्होंने सोचा कि यह स्थिति क्यों बनी.
योगी ने बताया कि थाईलैंड और जापान जैसे देशों से प्रेरणा लेकर उन्होंने “वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP)” योजना शुरू की. जापान ने हर प्रांत को अलग उत्पाद में विशेषज्ञता दी और थाईलैंड ने भी यही नीति अपनाई. उत्तर प्रदेश के 75 जिलों में 57 विशिष्ट उत्पाद चिन्हित किए गए. सिद्धार्थनगर का काला नमक, गोरखपुर की टेराकोटा कला और मुजफ्फरनगर का गुड़ जैसे उत्पादों को नई पहचान दी जा रही है.
उन्होंने कहा कि नागरिक अधिकारों की चर्चा तो होती है, लेकिन कर्तव्यों की नहीं. प्रधानमंत्री ने 2022 में नागरिक कर्तव्यों पर बल दिया था, और अब उत्तर प्रदेश से इसकी शुरुआत होनी चाहिए.
योगी ने विधानसभा में “विकसित उत्तर प्रदेश” पर 24 घंटे चलने वाली चर्चा का भी उल्लेख किया. प्रारंभ में सदन में भीड़ कम होती गई, पर रात 11 बजे भी 300 से अधिक सदस्य उपस्थित थे. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक विमर्श का सकारात्मक उदाहरण बताया.
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि देश को फिर से विभाजित होने से बचाना होगा. उन्होंने सभी नागरिकों से पंच प्रण को आत्मसात कर 2047 तक भारत को विश्व शक्ति बनाने का आह्वान किया, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपने पूर्वजों के सपनों को साकार कर सकें.

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