गोरखपुर में सड़े सीरे से बन रही मिठाई का खुलासा: कई घरों में चल रहा धंधा, बच्चों की सेहत पर मंडरा रहा खतरा

आयाम स्वरूप, गोरखपुर | गोरखपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने छापेमारी कर खुलासा किया कि कई घरों में सड़े सीरे और खराब क्वालिटी के मैदे से मिठाई बनाई जा रही थी। ये मिठाइयां आकर्षक पैकिंग कर आगरा नाम से ग्रामीण इलाकों में बेची जाती थीं। फैक्ट्री में दुर्गंध और कीड़े तक मिले। व्यापारी प्रतिदिन 8–10 हजार रुपये कमाते थे। विभाग अब ऐसी और फैक्ट्रियों की तलाश में जुटा है।

गांवों में 1 रुपये में बिकने वाली छोटी-छोटी मिठाइयां बच्चों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती हैं। ये मिठाइयां बेहद सस्ते दाम पर तैयार होती हैं और बच्चों के बीच इनकी खपत भी काफी है। लेकिन जांच में सामने आया कि इन्हें सड़े हुए सीरे और खराब क्वालिटी के मैदे से बनाया जा रहा है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई में खुलासा
शनिवार को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने छापेमारी की तो इसका खुलासा हुआ। ये मिठाई कई घरों में चोरी-छिपे बनाई जा रही थी। घर के भूतल पर परिवार रहता है और ऊपर की मंजिल पर मिठाई बनाने की फैक्ट्री चलती है।

लाइसेंस होने के बावजूद व्यापारी यह काम छुपाकर कर रहे थे क्योंकि यहां बनने वाली मिठाई स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। जांच में पाया गया कि जो सीरा इस्तेमाल किया जा रहा था, वह इस कदर सड़ा हुआ था कि उसकी दुर्गंध सहना मुश्किल था और उसमें कीड़े पनप चुके थे। फिलहाल विभाग ऐसी और फैक्ट्रियों की तलाश में जुटा है।

सिर्फ घर के लोग करते थे काम
इस धंधे में बाहरी लोगों को शामिल नहीं किया जाता। पकड़ी गई फैक्ट्री में सिर्फ दो भाई मिलकर काम कर रहे थे। किसी बाहरी कर्मचारी को नहीं रखा गया था ताकि बात बाहर न फैले। लाइसेंस भी सामान्य फूड प्रोडक्ट का था, लेकिन मुनाफे के चक्कर में व्यापारी जानलेवा मिठाई तैयार कर रहे थे।

रोजाना 8 से 10 हजार रुपये की कमाई
अधिकारियों के मुताबिक, इस अवैध धंधे से रोजाना 8 से 10 हजार रुपये की कमाई हो रही थी। एक डिब्बा मिठाई (लगभग 250 ग्राम) 15 रुपये में बेची जाती थी। फुटकर बाजार में यह मिठाई 1 रुपये प्रति पीस तक में बिकती थी।

बड़ी दुकानों से खरीदते थे खराब सीरा
मिठाई की बड़ी दुकानों पर इस्तेमाल के बाद बचा हुआ सीरा 3-4 दिन में खराब होकर टिन में इकट्ठा हो जाता था। व्यापारी इसे 200 रुपये प्रति टिन में खरीद लेते थे। दुर्गंध भरे इस सीरे को कोयले की भट्ठी पर गर्म करके उसमें थोड़ी चीनी, मैदा और पाउडर मिलाकर मिठाई तैयार की जाती थी।

फैक्ट्री में खड़ा होना मुश्किल
फैक्ट्री से 6 टिन सड़ा हुआ सीरा बरामद हुआ। वहां दुर्गंध इतनी तेज थी कि खड़ा होना मुश्किल था। सीरे में मरे हुए कीड़े तक मिले। इसे छानकर गर्म किया जाता और फिर मैदा, चीनी व पाउडर मिलाकर मिठाई बनाई जाती थी। ये काम करने वाले झारखंड के रहने वाले बताए गए हैं।

सुंदर पैकिंग में होती थी बिक्री
तैयार की गई मिठाइयों की पैकिंग काफी आकर्षक बनाई जाती थी। एक डिब्बे में 30 मिठाइयां पैक की जातीं और गोरखपुर के ग्रामीण क्षेत्रों में भेजी जाती थीं। पैकिंग अच्छी होने के कारण ये मिठाइयां आसानी से बिक जाती थीं।

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