चाबहार पोर्ट पर नहीं लगेगी अमेरिकी पाबंदी, भारत को मिली 6 महीने की छूट

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि ईरान के चाबहार पोर्ट पर अमेरिकी प्रतिबंध लागू नहीं होंगे। भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत चल रही है। भारत ने ईरान के साथ 10 साल का कॉन्ट्रैक्ट किया है, जिसमें इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड 370 मिलियन डॉलर का निवेश करेगा।

ईरान के चाबहार बंदरगाह पर मिली छूट के बारे में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने बयान दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफ़िंग में कहा, “हमें उस बंदरगाह पर लागू अमेरिकी प्रतिबंधों से छह महीने की अवधि के लिए छूट दी गई है।”
भारत को यह छूट उस निर्णय के बाद मिली है जब अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह का संचालन करने वाले लोगों पर सितंबर महीने के अंत से प्रतिबंध लागू कर दिया था। भारत ईरान के साथ मिलकर ओमान की खाड़ी पर स्थित इस बंदरगाह में टर्मिनल का विकास कर रहा है।
13 मई 2024 को भारत ने इस बंदरगाह के संचालन के लिए 10 साल का कॉन्ट्रैक्ट किया था, जिससे उसे मध्य एशिया के देशों के साथ व्यापार बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह पहला मौक़ा था, जब भारत ने विदेश में किसी बंदरगाह के प्रबंधन की ज़िम्मेदारी ली थी।
चाबहार पोर्ट इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर यानी आईएनएसटीसी के लिए काफ़ी अहमियत रखता है।
इस रूट से भारत की यूरोप तक पहुँच आसान हो जाती, साथ ही ईरान और रूस को भी फ़ायदा होता। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत रूसी तेल कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध के किसी भी असर का भी विश्लेषण कर रहा है। मंत्रालय ने कहा, “हम रूसी तेल कंपनियों पर हाल ही में लगे अमेरिकी बैन के असर की स्टडी कर रहे हैं। हमारे फैसले जाहिर है, ग्लोबल मार्केट के बदलते हालात को ध्यान में रखते हैं।”
प्रवक्ता ने कहा, “एनर्जी सोर्सिंग के बड़े सवाल पर हमारी राय सबको पता है। इस कोशिश में, हम अपने 1.4 बिलियन लोगों की एनर्जी सिक्योरिटी जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग सोर्स से सस्ती एनर्जी पाने की जरूरत से निर्देशित होते हैं।”

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