
DDU में पेड़ कटाई विवाद पर ABVP का प्रदर्शन, DSW को पहनाया प्रतीकात्मक ‘नाकारा मेडल’
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में पेड़ों की कटाई को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने छात्र कल्याण अधिष्ठाता (DSW) कार्यालय का घेराव किया और जमकर नारेबाजी की।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद कार्यकर्ताओं ने गोरखपुर विश्वविद्यालय में पेड़ कटाई के खिलाफ प्रदर्शन कर DSW कार्यालय का घेराव किया। छात्रों ने प्रशासन के “टैनिक एसिड” वाले तर्क को गलत बताते हुए DSW को प्रतीकात्मक ‘नाकारा गोल्ड मेडल’ पहनाया। ABVP ने 1192 पेड़ों की कटाई पर सवाल उठाए और कहा कि समस्याओं का समाधान रखरखाव से हो सकता था। वहीं विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने फैसले को सही बताया और जांच जारी होने की बात कही।

‘टैनिक एसिड’ वाले बयान पर जताया विरोध
प्रदर्शन के दौरान एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण को भ्रामक और अवैज्ञानिक बताते हुए डीएसडब्ल्यू को प्रतीकात्मक रूप से ‘नाकारा गोल्ड मेडल’ पहनाकर विरोध दर्ज कराया।
दरअसल, बीते शुक्रवार को एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय परिसर में हरे-भरे पेड़ों की कटाई के खिलाफ आंदोलन किया था। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा था कि सागौन के पेड़ छात्रों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं और उनके पत्तों से निकलने वाला टैनिक एसिड परेशानी पैदा करता है। प्रशासन का कहना था कि छात्रहित में इन पेड़ों की कटाई जरूरी थी।
हालांकि, परिषद कार्यकर्ताओं ने इस तर्क को पूरी तरह गलत और तथ्यहीन बताया। उनका कहना है कि टैनिक एसिड निकलना एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे आधार बनाकर बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई करना पर्यावरण के प्रति लापरवाही दर्शाता है।
1192 पेड़ों की कटाई योजना पर उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय प्रशासन से सवाल किया कि जब कुल 1192 पेड़ों की कटाई की योजना बनाई गई है, तो उनमें से 1013 पेड़ों को सागौन बताकर बाकी 179 अन्य प्रजातियों के पेड़ों की कटाई को किस आधार पर सही ठहराया जा रहा है।
कार्यकर्ताओं का कहना है कि इन पेड़ों में कई ऐसी प्रजातियां शामिल हैं, जो पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
“वैज्ञानिक समाधान की जगह पेड़ काटे जा रहे”
एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रशासन द्वारा पेड़ों के नीचे घास न उगने, दीमक लगने, भवनों और सोलर पैनलों को नुकसान पहुंचने जैसे तर्क केवल कटाई को सही साबित करने के लिए दिए जा रहे हैं।
उनका कहना है कि यदि ऐसी समस्याएं थीं तो उनका समाधान वैज्ञानिक तरीके से रखरखाव, छंटाई और जैविक उपचार के जरिए किया जा सकता था, न कि पेड़ों को काटकर।
ABVP ने प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप
एबीवीपी के इकाई मंत्री अरविंद मिश्रा ने कहा कि यह ‘नाकारा गोल्ड मेडल’ उस अधिकारी को पहनाया गया है, जो छात्रों, पर्यावरण और जनभावनाओं के प्रति जवाबदेह होने के बजाय प्रशासनिक दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी परिषद विश्वविद्यालय प्रशासन के इस तरह के भ्रामक स्पष्टीकरण को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं करेगी।
DSW प्रो. अनुभूति दुबे ने क्या कहा?
वहीं, इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रो. अनुभूति दुबे ने कहा कि उन्हें इस विरोध प्रदर्शन की जानकारी नहीं मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि पेड़ों की कटाई को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जो तथ्य सामने रखे गए हैं, वे पूरी तरह सही हैं।
उन्होंने बताया कि फिलहाल पूरे मामले की जांच विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित कमेटी कर रही है।

