अफगानिस्तान में तेल निकालने की प्रक्रिया शुरू

होर्मुज संकट के बीच अफगानिस्तान में तेल के विशाल भंडार की खोज और उत्पादन शुरू हो गया है. उत्तरी जौजजान प्रांत के अमू दरिया बेसिन से प्रतिदिन 500 क्यूबिक मीटर तेल निकाला जा रहा है.

मध्यपूर्व तनाव की वजह से विश्वभर में तेल संकट बना हुआ है. ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट बंद करने से दुनिया का 20 फीसद तेल का व्यापार प्रभावित हुआ है. भारत ने भी अपने तेल आयात के दूसरे विकल्प खोजने शुरू कर दिए हैं, हाल ही में अफ्रीका के कई देशों से तेल भारत आया है. इस बीच अफगानिस्तान से एक ऐसी खबर आई है, जो तेल की कमी को दूर करने की उम्मीद जगा रही है. अफगानिस्तान के माइंस और पेट्रोलियम मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि उसने उत्तरी जौजजान प्रांत में अमू दरिया तेल बेसिन के जमराड साई इलाके में पांच कुओं से तेल निकालना शुरू कर दिया है.

बयान के मुताबिक कुओं से अभी हर दिन लगभग 500 क्यूबिक मीटर तेल निकल रहा है. पिछले छह महीनों में ही, जमराड साई इलाके में 400 किमी के नए सीस्मिक सर्वे किए गए, जिससे तेल और गैस की और संभावनाओं का पता चला. अगर अफगानिस्तान में अपने स्रोतों से तेल निकालने और फिर उसका निर्यात करने में कामयाब होता है, तो पिछले कई दश्कों से चल रही देश में अस्थरता और बदहाली दूर की जा सकती है. साथ ही ये भारत के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है. भारत के अफगानिस्तान के साथ अच्छे रिश्ते हैं. अगर तालिबान तेल निर्यात शुरू करता है, तो भारत अफगानिस्तान से तेल खरीद सकता है. अफगानी तेल भारत कम समय और कम लागत में आ सकता है.

अफगान इंजीनियरों द्वारा किए गए तीन साल के गहन जियोलॉजिकल सर्वे, रिसर्च और ड्रिलिंग के बाद अब इस फील्ड के बारह कुओं में से पांच में पायलट प्रोडक्शन शुरू हो गया है. अधिकारियों ने कहा कि अफगान स्पेशलिस्ट द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के सिस्टमैटिक मैनेजमेंट और इस्तेमाल के लिए अब बड़े प्लान लागू किए जा रहे हैं. अफगान सरकार ने देश में तेल, गैस और मिनरल निकालने को बढ़ाने के मकसद से घरेलू और विदेशी दोनों कंपनियों के साथ कई कॉन्ट्रैक्ट साइन किए हैं.

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