
नेपाल ने लिपुलेख को अपनी संप्रभु भूमि बताया, भारत ने जताया आपत्ति
नेपाल सरकार ने 1816 की सुगौली संधि का हवाला देते हुए कहा है कि काली नदी के पूर्व का क्षेत्र, जिसमें लिपुलेख और कालापानी शामिल हैं, उसका हिस्सा है।
नेपाल ने 3 मई 2026 को भारत और चीन को राजनयिक संदेश भेजकर लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को अपनी संप्रभु भूमि बताया है। नेपाल ने इन क्षेत्रों में अपनी मर्जी के बिना किसी भी गतिविधि या कैलाश मानसरोवर यात्रा के आयोजन पर कड़ी आपत्ति जताई है। इस पर भारत ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि लिपुलेख के ऊपर नेपाल का दावा ऐतिहासिक साक्ष्यों पर आधारित नहीं है।
नेपाल सरकार ने 1816 की सुगौली संधि का हवाला देते हुए कहा है कि काली नदी के पूर्व का क्षेत्र, जिसमें लिपुलेख और कालापानी शामिल हैं, उसका हिस्सा है। 2020 में, नेपाल ने एक नया राजनीतिक मानचित्र जारी किया था जिसमें इन विवादित क्षेत्रों को अपने नक्शे में शामिल किया था।
भारत ने स्पष्ट किया है कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है और 1954 से ही एक पारंपरिक मार्ग के रूप में उपयोग किया जा रहा है।
नेपाल का यह कदम भारत द्वारा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख दर्रे के माध्यम से सड़क बनाए जाने के बाद उपजे तनाव का हिस्सा है।

