
80 से अधिक UN देशों ने इजराइल के वेस्ट बैंक लैंड रजिस्ट्रेशन फैसले की निंदा की
इजरायल और फलस्तीन के बीच जंग जारी है। इस बीच इजरायल सरकार ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के बड़े इलाकों को स्टेट प्रॉपर्टी के तौर पर दावा करने के प्लान को मंजूरी दे दी है।
इजरायल सरकार ने इसे लेकर एक बिल भी पेश किया है, जिसे फलस्तीन इलाके के ज्यादा हिस्से पर कब्जा करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
फाइनेंस मिनिस्टर बेजालेल स्मोट्रिच, जस्टिस मिनिस्टर यारिव लेविन और डिफेंस मिनिस्टर इजरायल काट्ज ने पेश किया था। स्मोट्रिच के मुताबिक, यह नया बिल इजरायल सरकार की वेस्ट बैंक इलाके में बस्तियों को बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा है।
इस बिल के तहत, इजरायल कब्जे वाले वेस्ट बैंक में जमीन के मालिकाना हक के सेटलमेंट का प्रोसेस फिर से शुरू करेगा, यह प्रोसेस 1967 में छह दिन के युद्ध के बाद से रुका हुआ है।
इस प्रोसेस के फिर से शुरू होने पर, जमीन पर दावा करने वाले किसी भी व्यक्ति को अपना मालिकाना हक साबित करने के लिए जरूरी दस्तावेज दिखाने होंगे।
जमीन के मालिकाना हक के क्राइटेरिया भी बदल गए हैं और इस नए बिल से हजारों फलस्तीनयों को उनकी जमीन के हक से बेदखल किया जा सकता है। इसके अलावा, नया बिल वेस्ट बैंक में एरिया C पर फोकस करेगा, जो पूरी तरह से इजरायल मिलिट्री कंट्रोल वाला इलाका है।
फलस्तीन, मिस्र और कतर ने नए बिल को इजरायल का कब्जा बताया। फलस्तीन प्रेसिडेंसी ने इजरायल सरकार के इस फैसले की निंदा की है। इसे इंटरनेशनल कानून का खुला उल्लंघन कहा है।
80 से अधिक संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों ने इजराइल द्वारा कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक लैंड रजिस्ट्रेशन फैसले की कड़ी निंदा की है। इन देशों ने कहा है कि यह एकतरफा कदम और अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवाधिकारों के खिलाफ बताया है

