
अमेरिका और ईरान जंग के कितने करीब!
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को लगातार हमले की धमकियां दे रहे हैं। ईरान की कार्रवाई में अब तक 2500 से अधिक प्रदर्शनकारियों की मौतें हो चुकी हैं। लेकिन अमेरिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई से बच रहा है।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच जंग होने वाली है? यह सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि पश्चिम एशिया में फिलहाल हालात ऐसे ही बनते दिख रहे हैं। अमेरिका और ब्रिटेन की ओर से अपने नागरिकों को ईरान न जाने की सलाह दी गई है। इसके अलावा ईरान ने अपना एयरस्पेस कमर्शल फ्लाइट्स के लिए बंद कर दिया है। इससे साफ है कि दोनों तरफ से सतर्कता बरती जा रही है और तनाव को देखते हुए जंग की आशंका बढ़ गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तो लगातार ईरान को जंग और सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहे हैं। वहीं ईरान का कहना है कि ऐसी किसी भी स्थिति में जो आग भड़केगी वह पूरे इलाके को चपेट में लेगी।
वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति के हवाले से एनसीबी न्यूज ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रंप लंबी जंग नहीं चाहते हैं। उन्होंने अपने सुरक्षा सलाहकारों से ईरान के खिलाफ ऐसे ऐक्शन पर विचार करने को कहा है, जिससे एक निर्णायक कदम उठाया जा सके। वह नहीं चाहते कि ईरान के खिलाफ महीनों लंबी जंग चले। ऐसे में संभावना है कि अचानक ही ईरान पर कोई बड़ा अटैक हो सकता है। अमेरिकी नहीं चाहता कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी तरह के जमीनी संघर्ष में शामिल हो। हालांकि अमेरिकी सलाहकार इस बात को लेकर आश्वस्त नहीं हैं कि किसी एक हमले से ईरान की कमर तोड़ी जा सकती है।
उनकी चिंता यह है कि ईरान भी हमले का जवाब देगा और मिडल ईस्ट में अमेरिकी ठिकानों को नुकसान पहुंच सकता है। इराक, सीरिया समेत कई देशों में अमेरिका के ठिकाने हैं, जो ईरान के टारगेट में आ सकते हैं। इसके अलावा ईरान को जवाब देने के लिए इस इलाके में अमेरिका के पास बहुत ज्यादा एसेट्स भी नहीं हैं। इस बीच खबर है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से छोटे और टारगेट अटैक किए जा सकते हैं। इसके बाद यदि ईरान की प्रतिक्रिया आती है तो फिर जवाबी कार्रवाई की जाएगी। अमेरिका यह नहीं चाहता कि वह खुद बड़ा अटैक करे। ऐसी स्थिति में ईरान को थोड़ा उकसाने के बाद ही संघर्ष शुरू करने की तैयारी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है, तो इसका उल्टा असर होगा। यह हमला सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और ईरानी सरकार को घरेलू समर्थन जुटाने, आंतरिक विरोध प्रदर्शनों को गैर-कानूनी ठहराने और बाहरी खतरे के खिलाफ क्षेत्रीय गठबंधनों को मजबूत करने में मदद करेगा। ऐसे में अमेरिका को इस हमले का अंजाम भुगतना होगा और ईरान में तख्तापलट की उम्मीदें पूरी तरह से टूट जाएंगी।

