हज़ारों साल पुराने शंख, ध्वनि तकनीक का देते है संकेत

स्पेन में मिली हजारों साल पुरानी शंख-टरंपेट्स दुनिया के सबसे पुराने संगीत वाद्य हो सकते हैं. वैज्ञानिकों का दावा है कि ये नियोथलिक काल में संगीत और लंबी दूरी की सूचना देने के लिए इस्तेमाल होते थे.

स्पेन के कैटेलोनिया क्षेत्र में 6,000 साल पुराने 12 विशाल शंख मिले है. ये देखने में बेहद ही अजीबोगरीब है. यह शंख वैज्ञानिकों के लिए रोमांच का बड़ा विषय बन गए हैं. ये शंख नियोथलिक बस्तियों और प्राचीन खानों से मिले हैं और इनकी उम्र 6,000 साल मानी जा रही है. रिसर्चर का कहना है कि ये सिर्फ सजावट या खाना पकाने की चीजें नहीं थे, बल्कि इन्हें ट्रंपेट की तरह बजाने के लिए खास तरीके से तराशा गया था.
बार्सिलोना विश्वविद्यालय के रिसर्चर मिकेल लोपेज गार्सिया बचपन से शंख की आवाज के दीवाने थे. उन्होंने आठ पुराने शंख-टरंपेट्स पर आवाज निकालकर पता लगाया कि इनसे निकलने वाला टोन बेहद शक्तिशाली और आधुनिक फ्रेंच हॉर्न जैसा है. यानी प्राचीन इंसानों ने बिना किसी आधुनिक तकनीक के ऐसा वाद्य बना लिया था, जो दूर तक आवाज भेज सके.
रिसर्च के अनुसार इनका उपयोग दो तरीकों से होता था. पहला एक-दूसरे से दूर रहने वाले समुदायों के बीच संदेश भेजने के लिए. दूसरा खानों में काम करने वाले लोगों के बीच संपर्क बनाने के लिए. कई शंख खदानों की अलग-अलग गैलरी में मिले हैं, जो संकेत देता है कि मजदूर शायद इन्हें चेतावनी देने या दिशा बताने के लिए इस्तेमाल करते होंगे.
लोपेज और उनकी साथी रिसर्चर्स डियाज-अंद्रेउ ने शंखों पर कई तरह के प्रयोग किए. उन्होंने पाया कि शंख में हाथ डालने से टोन बदला जा सकता है, और t या r साउंड के साथ फूंकने पर आवाज का रंग भी बदल जाता है. इसका मतलब यह है कि ये शंख सिर्फ सिग्नल देने के लिए ही नहीं, बल्कि सरल धुनें और अभिव्यक्ति भी पैदा कर सकते थे. रिसर्चर्स का कहना है कि ये शंख यूरोप की सबसे पुरानी ध्वनि तकनीकों में से एक हो सकते हैं. इनके जैसे ही एक शंख फ्रांस की मार्सूलास गुफा में मिला था, जिसकी उम्र 18,000 साल मानी जाती है. यानी शंख-टरंपेट का उपयोग इंसान हजारों साल से कर रहा है, और स्पेन के शंख उसी परंपरा की अगली कड़ी साबित हो सकते हैं.

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