DDU का कनाडा के साथ 5 साल का MoU

गोरखपुर विश्वविद्यालय ने कनाडा के प्रतिष्ठित संगठन कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच शिक्षा, शोध और उद्योग से जुड़े अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। विश्वविद्यालय ने कनाडा के प्रतिष्ठित संगठन कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता (MoU) किया है। यह समझौता अगले पाँच वर्षों तक प्रभावी रहेगा। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच शिक्षा, शोध और उद्योग से जुड़े अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इससे विश्वविद्यालय के छात्र, शोधार्थी और शिक्षक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अध्ययन और अनुसंधान के नए अवसर प्राप्त कर सकेंगे। यह पहल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उस सोच को आगे बढ़ाती है, जिसके अंतर्गत भारतीय विश्वविद्यालयों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सशक्त बनाया जा रहा है। भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक वैश्विक जरूरतों से जोड़ते हुए छात्रों को अंतरराष्ट्रीय मंच के लिए तैयार करना इस सहयोग का प्रमुख लक्ष्य है।
इस सहयोग के तहत कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स, कनाडा में गोरखपुर विश्वविद्यालय के अकादमिक और शोध कार्यों के लिए एक सहयोगी मंच के रूप में काम करेगा। इसके साथ ही भविष्य में ऑनलाइन और हाइब्रिड डिग्री कार्यक्रम शुरू करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। समझौते में बौद्धिक संपदा अधिकार, संयुक्त शोध प्रकाशन, गोपनीयता और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से जुड़े प्रावधानों को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। कनाडियन हिंदू चैंबर ऑफ कॉमर्स मुख्य रूप से एक व्यावसायिक और आर्थिक संगठन है, लेकिन यह शिक्षा और बौद्धिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भी सक्रिय भूमिका निभाता है। यह संगठन सीधे शोध कार्य नहीं करता, बल्कि विश्वविद्यालयों, उद्योग जगत, नीति-निर्माताओं और वैश्विक हिंदू प्रवासी समुदाय के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करता है। कनाडा की ओर से आए प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संगठन के चेयरमैन नरेश कुमार चावड़ा ने किया। विश्वविद्यालय की ओर से सहभागिता इस समझौते पर विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर कुलसचिव धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव, वित्त अधिकारी जय मंगल राव सहित विश्वविद्यालय के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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