
खेती करना सिखाएगी गोरखपुर यूनिवर्सिटी… बदलने वाली किसानों की किस्मत
DDU में एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हाईटेक नर्सरी बनाई जाएगी. उद्यान और खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने भी 99.65 लाख रुपये दिए हैं. इस पैसे से उच्च गुणवत्ता वाले रोगमुक्त पौधे किसानों तक पहुंचाए जाएंगे.
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय (DDU) अब कृषि क्षेत्र में एक बड़ी पहल करने जा रहा है. विश्वविद्यालय ने अपने ‘कृषि आउटलेट’ को शुरू करने का फैसला किया है, जिसके माध्यम से किसान और आम जनता उन्नत किस्म के कृषि उत्पाद, बीज और पौध सामग्री किफायती दरों पर सीधे विश्वविद्यालय से प्राप्त कर सकेंगे. यह आउटलेट दिसंबर तक इंटरनेशनल हॉस्टल के सामने शुरू होने की योजना है. DDU में एक करोड़ रुपये से अधिक की लागत से हाईटेक नर्सरी स्थापित की गई है. इसके अलावा, उद्यान और खाद्य प्रसंस्करण विभाग ने विश्वविद्यालय के लिए 99.65 लाख रुपये की एक बड़ी परियोजना भी स्वीकृत की है.
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य विश्वविद्यालय, छात्रों और किसानों को एक साझा मंच पर लाकर कृषि शिक्षा, आधुनिक तकनीक और विस्तार सेवाओं को मजबूती देना है.
यह नया कृषि आउटलेट यूनिवर्सिटी चौराहा-मोहद्दीपुर रोड पर स्थित नेपाली छात्रावास (इंटरनेशनल हॉस्टल) के सामने खोला जाएगा. यहां प्रमाणित और हाइब्रिड किस्मों के बीज और पौधे तैयार किए जाएंगे. किसान सीधे यहां से लाभ उठा सकेंगे. इसके साथ, DDU परिसर में एक ‘सिंगल विंडो कृषि तकनीकी सूचना केंद्र’ भी स्थापित किया जाएगा. यहां कृषि वैज्ञानिकों की ओर से किसानों को निःशुल्क परामर्श मिलेगा. एक एकड़ में एक मॉडल फार्म भी तैयार किया जाएगा, जिसे किसानों के प्रशिक्षण और प्रदर्शन के लिए ‘स्मार्ट फार्म’ के रूप में विकसित किया जाएगा.
DDU के कृषि और प्राकृतिक संसाधन विभाग के निदेशक डॉ. राम रतन सिंह के अनुसार, इस आउटलेट के माध्यम से किसान ऑफ-सीजन में भी विभिन्न प्रकार की सब्जियां और पौधे उगाकर अपनी उपज को तैयार कर सकेंगे. इससे किसानों की आय में अच्छी-खासी वृद्धि होगी. यहां के छात्रों को पॉली हाउस और पौध प्रवर्धन सहित आधुनिक कृषि विपणन (एग्री-मार्केटिंग) तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. कृषि सूचना केंद्र और आउटलेट खोलने की प्रक्रिया अप्रैल में ही कार्यकारी परिषद (Executive Council) से अनुमोदित हो गई थी. अब इसे दिसंबर तक शुरू करने की तैयारी है. यह पहल डीडीयू को केवल शिक्षा केंद्र तक सीमित न रखकर, सीधे समाज और स्थानीय किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण में सक्रिय भागीदार बनाएगी.

