
कारोबारी BR Shetty पर दुबई कोर्ट ने लगाया 408 करोड़ रुपये का जुर्माना
कभी यूएई के बड़े कारोबारी रहे बीआर शेट्टी पर दुबई की कोर्ट ने भारी जुर्माना लगाया है। यह जुर्माना उन्हें कोर्ट में झूठ बोलने के लिए लगाया गया है।
यूएई के बड़े भारतीय बिजनेसमैन बीआर शेट्टी को दुबई इंटरनेशनल फाइनेंशियल सेंटर (DIFC) कोर्ट ने एक बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने उन्हें स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (DIFC ब्रांच) को 168.7 मिलियन दिरहम (करीब 408 करोड़ रुपये) चुकाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पाया कि शेट्टी ने कोर्ट में झूठ बोला था। उन्होंने करीब 183.5 मिलियन दिरहम के लोन के लिए पर्सनल गारंटी पर साइन करने की बात से इनकार कर दिया था।
8 अक्टूबर को जारी हुए फैसले में जस्टिस एंड्रयू मोरन ने शेट्टी की गवाही को ‘झूठ का एक अविश्वसनीय तमाशा’ बताया। उन्होंने कहा कि 29 सितंबर की सुनवाई के दौरान उनके बयान ‘असंगत और बेतुके’ थे। कोर्ट ने यह भी कहा कि गवाहों और कागजात से मिले ‘भारी सबूत’ इस बात को साबित करते हैं कि शेट्टी ने दिसंबर 2018 में गारंटी पर साइन किए थे। इसी वजह से वे इस कर्ज के लिए व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार हैं। एक समय बीआर शेट्टी 10 अरब डॉलर (करीब 88 हजार करोड़ रुपये) की कंपनी के मालिक थे।
साल 1973 में शेट्टी करीब 8 डॉलर (आज के मुकाबले करीब 700 रुपये) लेकर बेहतर अवसरों की तलाश में यूएई चले गए। देश के पहले मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के तौर पर कुछ समय काम करने के बाद, उन्होंने साल 1975 में न्यू मेडिकल सेंटर (NMC) की स्थापना की। उस समय यह क्लिनिक बहुत छोटा था और उनकी पत्नी चंद्रकुमारी शेट्टी ही एकमात्र डॉक्टर थीं। उनका लक्ष्य यूएई में तेजी से बढ़ते हुए लोगों के लिए व्यक्तिगत, किफायती और सुलभ स्वास्थ्य सेवा की कमी को पूरा करना था।
स्वास्थ्य सेवा से शुरुआत करते हुए NMC ने यूएई से आगे बढ़कर सऊदी अरब, ओमान, यूरोप और लैटिन अमेरिका तक विस्तार किया। उनके पास 45 से अधिक मेडिकल सुविधाएं थीं। शेट्टी ने साल 1980 में यूएई एक्सचेंज (UAE Exchange) लॉन्च करके वित्तीय सेवाओं में भी कदम रखा। इसका मुख्य उद्देश्य बड़ी संख्या में मौजूद प्रवासी समुदाय के लिए पैसे भेजने की सुविधा प्रदान करना था।
साल 2003 में उन्होंने नियोफार्मा (Neopharma) की स्थापना की, जिसने अबू धाबी में विश्व स्तरीय दवा निर्माण इकाई बनाई। साल 2014 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विदेशी मुद्रा कंपनी Travelex का अधिग्रहण किया, जिससे उनकी होल्डिंग फर्म Finablr के तहत समूह की वैश्विक उपस्थिति मजबूत हुई।
10 अरब डॉलर पहुंचा साम्राज्य
उनकी सबसे बड़ी व्यावसायिक उपलब्धि साल 2012 में तब आई जब एनएमसी हेल्थ लंदन स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होने वाली पहली यूएई स्वास्थ्य सेवा कंपनी बनी। शुरुआत में इसका मूल्य 1 अरब डॉलर से अधिक था, लेकिन अपने चरम पर एनएमसी का मूल्य 10 अरब डॉलर से ऊपर चला गया। शेट्टी की व्यक्तिगत संपत्ति का अनुमान 3.5 से 4 अरब डॉलर के बीच लगाया गया था। उन्हें भारत के पद्मश्री जैसे सम्मान मिले और दुनिया भर के व्यापारिक समुदायों में पहचान मिली। उनकी जीवनशैली भी उनकी सफलता को दर्शाती थी, जिसमें दुबई के बुर्ज खलीफा में आलीशान रियल एस्टेट और महंगी कारें शामिल थीं।
दिसंबर 2019 में अमेरिका स्थित एक्टिविस्ट शॉर्ट-सेलर मडी वाटर्स रिसर्च ने एनएमसी हेल्थ पर नकदी की मात्रा को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने और अरबों के छिपे हुए कर्ज का आरोप लगाया। इससे एनएमसी के शेयर की कीमत में भारी गिरावट आई और नियामक जांच शुरू हो गई। इसके बाद शेट्टी की मुसीबत बढ़ती चली गईं।
साल 2020 की शुरुआत में एनएमसी हेल्थ के बोर्ड ने सार्वजनिक रूप से 4 अरब डॉलर से अधिक के पहले से छिपे हुए कर्ज का खुलासा किया। जांच में जाली दस्तावेज, अनधिकृत ऋण और कई वर्षों से चली आ रही कमजोर कॉर्पोरेट गवर्नेंस का पता चला। भारी दबाव के चलते बीआर शेट्टी ने फरवरी 2020 में NMC हेल्थ में अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।
एनएमसी हेल्थ अब नई मालिकाना हक के तहत काम कर रही है और शेट्टी के नियंत्रण से बाहर है। वहीं, शेट्टी अभी भी कई देशों में कानूनी लड़ाई, संपत्ति फ्रीज और अपना नाम साफ करने के प्रयासों में उलझे हुए हैं। उनका कभी लाभदायक साम्राज्य लगभग समाप्त हो चुका है।

