गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार दिखेंगे डबल हंप ऊंट, जांस्कार पोनी और ड्रोन गिराने वाले चील

इस बार गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय सेना की रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर का एक खास दस्ता नजर आएगा। इस दस्ते में दो कूबड़ वाले ऊंट और जांस्कार पोनी शामिल होंगे।

इस साल गणतंत्र दिवस परेड में कर्तव्य पथ पर भारतीय सेना की एक अनोखी झलक देखने को मिलेगी। पहली बार इंडियन आर्मी के डबल हंप (दो कूबड़ वाले) ऊंट, जांस्कार पोनी और ड्रोन को मार गिराने के लिए ट्रेंड किए गए चील परेड का हिस्सा होंगे। ये सभी आर्मी की रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर (RVC) के दस्ते में शामिल रहेंगे। इस दस्ते का नेतृत्व कैप्टन हर्षिता करेंगी, जो वेटरनरी कोर में शामिल पहले महिला अधिकारियों के बैच का हिस्सा हैं।
पूर्वी लद्दाख में कठिन परिस्थितियों में सेना की मदद कर रहे बैक्ट्रियन ऊंट इस परेड का खास आकर्षण होंगे। डबल हंप ऊंटों का इस्तेमाल दो साल पहले एक नई पहल के तहत शुरू किया गया था। ये ऊंट अंतिम छोर तक जरूरी सामान पहुंचाने और पठारी इलाकों की रेतीली जमीन में गश्त के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। माइनस 20 डिग्री तापमान और 15 से 18 हजार फीट की ऊंचाई पर भी ये आराम से काम कर सकते हैं और करीब 200 किलो तक वजन ढोने में सक्षम हैं। इनके उपयोग से स्थानीय लोगों को रोजगार मिला है और लद्दाख में घटती डबल हंप ऊंटों की आबादी के संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है।
डबल हंप ऊंटों के साथ जांस्कार पोनी भी परेड में नजर आएंगी। ये मजबूत और सहनशील देशी नस्ल के घोड़े हैं, जो बेहद कठिन मौसम में भी कम बीमार पड़ते हैं। पूर्वी लद्दाख में इन्हें रसद और सामान पहुंचाने के साथ-साथ गश्त के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। ये माइनस 40 डिग्री तापमान और 18 हजार फीट की ऊंचाई पर भी काम कर सकती हैं और लगभग 70 किलो तक वजन उठा सकती हैं। भारतीय सेना धीरे-धीरे म्यूल्स की जगह जांस्कार पोनी को शामिल कर रही है।
परेड में रिमाउंट एंड वेटरनरी कोर के दस्ते के साथ चार ऐसे चील भी दिखाई देंगे, जिन्हें ड्रोन को मार गिराने के लिए ट्रेंड किया गया है। ये चील पलभर में उड़ते हुए ड्रोन पर झपटकर उसे नीचे गिराने की क्षमता रखते हैं। फिलहाल इनका ऑपरेशनल इस्तेमाल नहीं हो रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय सैन्य अभ्यासों में इन्हें शामिल किया जा चुका है और इनकी ट्रेनिंग लगातार जारी है।

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