
नगर निगम की बैठक का बहिष्कार कर क्यों धरने पर बैठे पार्षद
नगर निगम बोर्ड की बैठक में गोरखपुर महोत्सव के पास के लिए पार्षदों ने किया हंगामा। पार्षदों ने इसे अपने मान-सम्मान और मनोबल से जुड़ा विषय बताया।
गोरखपुर के नगर निगम सदन की 16वीं बैठक में उस समय अफरातफरी मच गई, जब गोरखपुर महोत्सव का पास न मिलने से नाराज 68 पार्षदों ने सदन हाल से बैठक का बहिष्कार कर बाहर धरने पर बैठ गए।
हालांकि जबकि सदन के अंदर केवल 12 पार्षदों के साथ मेयर डॉ मंगलेश श्रीवास्तव, नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल की कार्यवाही चलती रही। एक ही छत के नीचे नगर निगम के पार्षद दो हिस्सों में बंटे नजर आए।
बैठक शुरू होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के अधिकतर पार्षद एकजुट हो गए और स्पष्ट कहाकि, जब तक हम सभी पार्षदों को गोरखपुर महोत्सव का पास नहीं मिलेगा, तब तक वे सदन की कार्यवाही में भाग नहीं लेंगे। पार्षदों ने इसे अपने मान-सम्मान और मनोबल से जुड़ा विषय बताया।
पार्षदों का आरोप है कि गोरखपुर महोत्सव की संपूर्ण व्यवस्था नगर निगम द्वारा की जा रही है, लेकिन नगर निगम के ही निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को पास से वंचित रखा गया। नाराज पार्षदों ने सवाल उठाया कि जब जनप्रतिनिधियों को ही प्रवेश नहीं मिलेगा, तो ऐसा महोत्सव किसके लिए आयोजित किया जा रहा है।
नाराज पार्षदों ने मांग की कि मंडलायुक्त स्वयं आकर सभी पार्षदों को गोरखपुर महोत्सव का पास उपलब्ध कराएं। धर्मशाला बाजार के पार्षद छठी लाल तो सदन के फर्श पर घंटे भर बैठे रहे।
इस विषय पर हंगामा बढ़ते देख मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने बताया कि पास पहले आए थे, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण वापस कर दिए गए और शीघ्र ही सभी पार्षदों के लिए नए पास भेजे जाएंगे।

