
सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर के जमानत आदेश पर लगाई रोक
उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत पर सर्वोच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। सीबीआई ने हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने सेंगर को नोटिस जारी कर एक हफ्ते में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
उन्नाव दुष्कर्म मामले में पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने कुलदीप सेंगर की जमानत को हरी झंडी दिखा दी थी, जिसपर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है।
CBI ने दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कुलदीप सेंगर की जमानत पर रोक लगा दी है।
सुप्रीम कोर्ट ने कुलदीप सेंगर को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। इसके लिए पूर्व विधायक को 1 हफ्ते का समय दिया गया है। कुलदीप सेंगर को अगले 7 दिन में जवाब दाखिल करना होगा।
सीबीआई ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें हाईकोर्ट ने पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को जमानत दे दी थी, साथ ही सजा पर भी रोक लगा दी थी। सीबीआई की ओर से SG मेहता ने अदालत के समक्ष ट्रायल कोर्ट द्वारा पारित दोषसिद्धि के आदेश को पढ़ते हुए बताया कि –अभियुक्त को 15 वर्ष, 10 महीने और 13 दिन की सजा दी गई है। उन्होंने कहा कि यह अवधि ट्रायल कोर्ट की तथ्यात्मक (factual) निष्कर्षों पर आधारित है। SG मेहता ने आगे बताया कि– दोषसिद्धि के खिलाफ अपील लंबित है, लेकिन ट्रायल कोर्ट का यह निष्कर्ष स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड पर मौजूद है। उन्होंने IPC की धारा 375 (बलात्कार की परिभाषा) का उल्लेख करते हुए कहा कि अभियुक्त निश्चित रूप से बलात्कार के अपराध में दोषी ठहराया गया है। इसके बाद SG मेहता ने संबंधित धाराओं को पढ़कर यह भी स्पष्ट किया कि कानून के तहत न्यूनतम और अधिकतम सजा की अवधि क्या निर्धारित है, जिससे यह साबित होता है कि ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप है।

