राहुल ने चीफ इन्फोर्मेशन कमिश्नर की नियुक्ति पर सवाल उठाए:पूछा- ST, OBC और अल्पसंख्यक समुदाय से कितने उम्मीदवार; पीएम, शाह के साथ बैठक में असहमति जताई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में सीआईसी, सीवीसी और सूचना आयोग के 8 पदों पर नियुक्ति को लेकर 88 मिनट की बैठक हुई। राहुल गांधी ने सरकार के सुझाए कई नामों पर असहमति जताते हुए डिसेंट नोट सौंपा।

चीफ इन्फॉर्मेशन कमिश्नर (CIC) और 8 इन्फॉर्मेशन कमिश्नर्स की नियुक्ति के लिए चयनित उम्मीदवारों की जातियों पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने असहमति जताई। इनकी नियुक्ति को लेकर बुधवार को PM मोदी, राहुल और अमित शाह के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में डेढ़ घंटे चली मीटिंग हुई। यह बैठक कई मायनों में महत्वपूर्ण रही क्योंकि इसमें लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार के सुझाए कई नामों पर कड़ा विरोध जताते हुए असहमति नोट सौंपा।
सीआईसी का पद 13 सितंबर से खाली है, जब मुख्य सूचना आयुक्त हीरालाल समारिया रिटायर हुए थे। सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले के दौरान केंद्र सरकार ने आश्वासन दिया था कि जल्द चयन समिति की बैठक बुलाकर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाएगी। बुधवार को पीएम के चैंबर में यह बैठक दोपहर एक बजे शुरू हुई और लगभग डेढ़ घंटे तक चली।

राहुल के सुझाव खारिज, विवाद बढ़ा
कांग्रेस सूत्रों ने आरोप लगाया कि राहुल को बैठक का विस्तृत एजेंडा पहले से नहीं दिया गया। उन्होंने सीआईसी पद के लिए कुछ नाम सुझाए थे, जिसे पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह ने खारिज कर दिया। चूंकि बैठक में सीवीसी और आठ सूचना आयुक्तों के नाम पर भी चर्चा चलती रही, इसलिए यह चर्चा लंबी चली। इससे पहले भी मल्लिकार्जुन खरगे ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर अपनी असहमति दर्ज कराई थी।
सीआईसी और सीवीसी दोनों ही पद सरकारी पारदर्शिता और सतर्कता व्यवस्था के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। ऐसे में इन पदों पर चयन को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव नया नहीं है। इस बार राहुल गांधी का असहमति नोट एक बार फिर विपक्ष की नाखुशी को सामने लाता है और नियुक्तियों पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर देता है।

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