ऊपर टमाटर, नीचे आलू! गोरखपुर यूनिवर्सिटी में तैयार हो रहे टोमटैटो

गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़े कृषि विद्यालय में कृषि विज्ञान की छात्राओं कविता पासवान और नेहा शुक्ला ने अपने गुरु के नेतृत्व में एक नई तकनीक विकसित की है। इसे टोमटैटो के नाम से जाना जाता है।

गोरखपुर विश्वविद्यालय के कृषि विभाग के प्रोफेसर ने छात्र-छात्राओं के साथ मिलकर टोमटैटो की तकनीकी विकसित की है, यानी पौधे की ग्राफ्टिंग (कलम बांधना) कर एक ही पौधे में टमाटर (Tomato)और आलू (Potato) की फसल हो सकेगी। इस तकनीक से आने वाले समय में किसानों को फायदा हो सकता है। फिलहाल इस पर रिसर्च जारी है, जल्द ही इसे प्रमाणिकता मिल जाएगी।
ग्राफ्टिंग यानी कलम बांधना यह तकनीक बेहद कारगर साबित होती है। अब इस तकनीक के सहारे गोरखपुर विश्वविद्यालय से जुड़े कृषि विभाग की छात्राओं ने अपने गुरु के नेतृत्व में एक ही पौधे में ऊपर टमाटर और नीचे आलू की तकनीक विकसित की है। इसके सहारे आने वाले समय में किसानों को कम जगह में एक ही पौधे से दो फसलें मिल सकेंगी, जिसका लाभ उन्हें सीधे तौर पर मिलेगा।
इसे तैयार करने में कुल 90 दिन का समय लगा। नेहा ने बताया कि टोमटैटो और पोमैटो एक वास्तविक पौधा है। इन दोनों को आपस में क्राफ्ट करा के एक संयुक्त पौध तैयार किया जाता है, जिसे पोमैटो या टोमटैटो नाम दिया गया है।
टमाटर और आलू दोनों ही पौधे solanaceae परिवार(नाइटशेड)के सदस्य हैं, इसलिए इनकी ग्राफ्टिंग सफल हो सकती है। टमाटर का वैज्ञानिक नाम solanum lycoperisicm और आलू Solanum tuberosum है जो एक ही परिवार के सदस्य हैं। इस तकनीक के माध्यम से ऊपर की और टमाटर और नीचे आलू की फसल तैयार हो सकती है। वही कविता पासवान का कहना है कि इसी तकनीक के आधार पर फूलों और बैंगन की सब्जी की भी खेती की जा सकती है, फिलहाल कविता “मेरीगोल्ड” तकनीक पर काम कर रही हैं।

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