बैंकों के विलय पर काम तेज, 5 ट्रिलियन इकोनॉमी के लिए देश को चाहिए ‘वर्ल्ड क्लास बैंक’

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का कहना है कि देश की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में बड़े बैंक बनाने को लेकर सरकार भी सक्रिय है, जो कि बढ़ती जरूरतों को पूरा कर सके.

बीते दिनों निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की है कि सरकार और Reserve Bank of India (RBI) के बीच फिर से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSU Banks) के विलय पर बातचीत शुरू हो चुकी है. इसका उद्देश्य देश में ‘विश्व-स्तरीय’ बैंक तैयार करना है, जो भारत की तेजी से बढ़ती आर्थिक जरूरतों खासकर उद्योग, बुनियादी ढांचे और क्रेडिट-डिमांड को पूरा कर सकें.
केंद्र सरकार एक बार फिर सरकारी बैंकों के विलय पर काम शुरू कर चुकी है. ऐसी योजना है कि 12 पब्लिक सेक्टर बैंक भविष्य में घटकर शायद सिर्फ 4 रह जाए. इस कदम के पीछे देश में एक ऐसा बैंकिंग सिस्टम बनाना है, जो न सिर्फ पैमाने में बड़ा हो, बल्कि ग्लोबल लेबल का हो.
दरअसल, बड़े बैंक होने से उसकी पूंजी मजबूत होती है, क्रेडिट देने की ज्यादा क्षमता होती है. देश को ऐसे बैंकों की जरूरत है. क्योंकि देश की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर की ओर तेजी बढ़ रही है, ऐसे में बड़े बैंक बनाने को लेकर सरकार भी सक्रिय है, जो कि बढ़ती जरूरतों को पूरा कर सके.
सरकार का मकसद सिर्फ विलय नहीं, बल्कि बैंकिंग सेक्टर की स्थिरता, बेहतर क्रेडिट लोन सुविधा, और विश्व-स्तरीय बैंक निर्माण है, जो भारत की विकास-गति में सहायक साबित हो सकते हैं.

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