ट्रंप ने एच-1बी वीज़ा की फ़ीस 1लाख डॉलर किया, भारत के लोगों पर पड़ेगा बड़ा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच-1बी वीजा आवेदन शुल्क को 1,00,000 डॉलर तक बढ़ाया । इस घोषणा के तुरंत बाद माइक्रोसॉफ्ट और जेपी मॉर्गन जैसी बड़ी कंपनियों ने कर्मचारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उस आदेश पर दस्तख़्त कर दिया है, जिसमें एच-1बी वीज़ा की आवेदन फ़ीस बढ़ाकर सालाना एक लाख डॉलर यानी लगभग 88 लाख रुपये कर दी गई है.

इसके साथ ही ट्रंप ने गोल्ड कार्ड वीज़ा प्रोग्राम के आदेश पर भी दस्तख़्त कर दिए. किसी व्यक्ति के लिए इसकी क़ीमत दस लाख डॉलर यानी लगभग नौ करोड़ रुपये और कंपनियों के लिए 20 लाख डॉलर यानी 18 करोड़ रुपये रखी गई है.

अमेरिकी एच-1बी वीज़ा की शुरुआत 1990 में हुई थी. ये कुशल कर्मचारियों को दिया जाता है. सबसे ज़्यादा एच-1बी वीज़ा भारतीयों को मिलते हैं. इसके बाद चीन के लोगों को ये वीज़ा दिया जाता है.

ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीज़ा पर ये क़दम अपनी नई आप्रवासन नीति के तहत उठाया है. अमेरिकी राष्ट्रपति लगातार यह आरोप लगाते रहे हैं कि ग़ैर अमेरिकी लोग अमेरिकी लोगों की नौकरियां खा रहे हैं. घोषणापत्र के अनुसार, मौजूदा वीजा धारकों सहित एच-1बी कर्मचारियों को 21 सितंबर (रविवार) रात 12:01 बजे पूर्वी समय से अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी, जब तक कि उनके नियोक्ता द्वारा कर्मचारी के लिए 1,00,000 अमेरिकी डॉलर का शुल्क नहीं चुकाया जाता। यानी अगर कर्मचारी समय से अमेरिका नहीं पहुंचते तो उनकी कंपनियों को प्रति कर्मचारी एक लाख डॉलर देने होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button