
पत्रकार हत्याकांड केस में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम बरी
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने छत्रपति हत्याकांड में डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया है। सीबीआई अदालत के फैसले को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए, हाई कोर्ट ने सबूतों के अभाव में उन्हें संदेह का लाभ दिया।
सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को अक्तूबर 2002 में उन्हें उनके घर के बाहर गोली मारी गई थी। 21 नवंबर 2002 को उनकी मौत हो गई। 2019 में सीबीआई कोर्ट ने राम रहीम को मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने शनिवार सुबह सीबीआई अदालत के फैसले को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए डेरा मुखी को इस मामले से बरी कर दिया है। हालांकि अदालत ने मामले में दोषी ठहराए गए अन्य तीन आरोपियों कुलदीप, निर्मल और किशन लाल की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
हाई कोर्ट ने यह फैसला आरोपियों द्वारा सीबीआई की विशेष अदालत के निर्णय के खिलाफ दायर अपीलों पर सुनवाई के बाद सुनाया। अदालत ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और दलीलों पर विस्तृत विचार करते हुए डेरा मुखी के खिलाफ आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित न होने के आधार पर उन्हें संदेह का लाभ देते हुए बरी करने का आदेश दिया। वहीं, अन्य तीन आरोपियों के खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों को पर्याप्त मानते हुए उनकी दोषसिद्धि और सजा को कायम रखा गया है।
मामला पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या से जुड़ा हुआ है, जिसने अपने समय में काफी सुर्खियां बटोरी थीं। छत्रपति ने अपने अखबार में डेरा से जुड़े कुछ गंभीर आरोपों को प्रकाशित किया था, जिसके बाद वर्ष 2002 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में व्यापक प्रतिक्रिया हुई थी और मामले की जांच बाद में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी गई थी।

