गोरखपुर में दांत के साथ पैदा हुआ नवजात: डॉक्टर बोले- 3 हजार बच्चों में एक होता है ऐसा मामला

बड़हलगंज में जन्म लेते ही बच्चे के मुंह में दिखा दांत, परिवार और डॉक्टर भी हुए हैरान

आयाम स्वरूप, गोरखपुर

गोरखपुर के बड़हलगंज क्षेत्र में एक दुर्लभ मामला सामने आया है। यहां एक नवजात बच्चे का जन्म मुंह में दांत के साथ हुआ। जन्म के समय ही बच्चे के निचले मसूड़े के बीचोंबीच दांत दिखाई देने पर परिजन हैरान रह गए। हालांकि डॉक्टरों ने इसे दुर्लभ लेकिन सामान्य स्थिति बताते हुए कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है। फिलहाल बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों ने दांत की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है। बच्चे की उम्र अभी आठ दिन है।

जन्म के बाद रोया तो मुंह में दिखा दांत

जानकारी के अनुसार बड़हलगंज निवासी एक महिला ने 11 जून को बच्चे को जन्म दिया। जन्म के बाद जब नवजात रोया तो उसके निचले मसूड़े के बीचोंबीच एक बड़ा दांत दिखाई दिया। यह देखकर परिजन और आसपास मौजूद लोग आश्चर्यचकित रह गए। हालांकि बच्चे की स्थिति सामान्य बनी रही।

एक-दो दिन बाद स्वास्थ्य संबंधी कुछ समस्या होने पर बच्चे को गोरखपुर के चंद्रा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। करीब पांच दिन तक इलाज के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस दौरान अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ भी नवजात के मुंह में मौजूद दांत को देखकर हैरान रह गए।

दांत को लेकर सतर्क हैं परिजन

बच्चे के परिजनों ने बताया कि वे बच्चे के स्वस्थ होने से बेहद खुश हैं। हालांकि जन्म से दांत होने के कारण शुरुआत में चिंता जरूर हुई, लेकिन डॉक्टरों ने इसे खतरनाक नहीं बताया है। परिजनों का कहना है कि वे बच्चे की स्थिति पर नजर रखेंगे और किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करेंगे।

जानिए क्या कहते हैं डॉक्टर

चंद्रा हॉस्पिटल के संचालक एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश चंद्रा ने बताया कि जन्म के समय बच्चे के मुंह में दांत होना बेहद दुर्लभ स्थिति होती है। मेडिकल भाषा में इसे “नियोनेटल टीथ” कहा जाता है।

उन्होंने बताया कि यह स्थिति लगभग 2,500 से 3,000 बच्चों में से किसी एक में देखने को मिलती है। यह सामान्य दूध का दांत नहीं होता, क्योंकि दूध के दांत आमतौर पर छह से आठ महीने की उम्र में निकलते हैं। यह दांत जन्म से पहले ही विकसित होकर बच्चे के साथ आता है।

क्या हो सकती हैं परेशानियां?

डॉ. चंद्रा के अनुसार ऐसे दांत आमतौर पर निचले जबड़े में होते हैं, जिससे बच्चे को दूध पीने में परेशानी हो सकती है। कई बार दांत के कारण मुंह की त्वचा छिलने का खतरा भी बना रहता है। दूध ठीक से न पी पाने के कारण बच्चा अधिक रो सकता है।

उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी प्रकार का भ्रम या अंधविश्वास नहीं पालना चाहिए। बच्चे को तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ को दिखाना चाहिए। जरूरत पड़ने पर दंत चिकित्सक इस दांत को सुरक्षित रूप से निकाल भी सकते हैं।

दांत निकलकर गले में जाने का भी खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार कुछ मामलों में दूध पीते समय दांत ढीला होकर निकल सकता है और गले के अंदर चला जा सकता है। यदि यह सांस की नली में पहुंच जाए तो बच्चे के लिए गंभीर और जानलेवा स्थिति पैदा हो सकती है। ऐसे मामलों में दंत चिकित्सक की सलाह लेकर दांत निकलवाना बेहतर विकल्प माना जाता है।

क्यों होता है ऐसा?

डॉक्टरों के मुताबिक जन्मजात दांत होने के पीछे अनुवांशिक कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। यदि परिवार में पहले भी ऐसा मामला रहा हो तो इसकी संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान कुछ परिस्थितियों में गर्भ में ही दांतों का विकास सामान्य से अधिक तेजी से शुरू हो जाता है, जिससे जन्म के समय दांत पूरी तरह विकसित हो जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे दांत अधिकतर बच्चों के निचले जबड़े के सामने वाले हिस्से में पाए जाते हैं।

फिलहाल पूरी तरह स्वस्थ है बच्चा

डॉक्टरों के अनुसार नवजात की स्थिति सामान्य है और वह पूरी तरह स्वस्थ है। परिवार को दांत की निगरानी करने तथा किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की सलाह दी गई है। यह दुर्लभ मामला फिलहाल क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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