
गीडा में नियमों के कारण नहीं खुल पा रही बैंक शाखाएं, उद्यमी परेशान
गोरखपुर के गीडा क्षेत्र में बैंकिंग सुविधाओं की कमी एक गंभीर समस्या बन गई है। उप-किरायेदारी प्रावधान न होने से बैंक शाखाएं नहीं खुल पा रही है। इससे उद्यमियों को बैंकिंग कार्यों के लिए शहर जाना पड़ता है, जिससे निवेश और औद्योगिक विकास प्रभावित हो रहा है।
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) क्षेत्र में बैंकिंग सुविधा एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। स्थिति यह है कि कई राष्ट्रीयकृत बैंक गीडा में शाखा खोलने के इच्छुक हैं, लेकिन नियमगत अड़चनों के कारण उन्हें उपयुक्त स्थान नहीं मिल पा रहा है।
हाल ही में यूनियन बैंक आफ इंडिया और इंडियन बैंक ने गीडा औद्योगिक क्षेत्र में शाखा खोलने के लिए सार्वजनिक रूप से विज्ञापन जारी कर स्थान की मांग की है। इसके बावजूद नियमों की बाध्यता के कारण मामला आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसकी मुख्य वजह गीडा के नियमों में उप-किरायेदारी का प्रविधान न होना बताया जा रहा है, जिससे बैंक किराये पर जगह नहीं ले पा रहे हैं। गीडा बोर्ड बैठक में भी इस पर संशोधन नहीं हो पाया है।
उद्योगपतियों का मानना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो इससे निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास की गति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में गीडा में बैंक शाखाओं की स्थापना के लिए नियमों में बदलाव की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। चैंबर आफ इंडस्ट्रीज के अध्यक्ष आरएन सिंह ने इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा कि वर्तमान समय में गीडा औद्योगिक क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बैंकिंग सुविधा का अभाव है।
उन्होंने कहा कि उद्योगों से बैंक काफी दूरी पर स्थित हैं, जिससे लेनदेन, नकद जमा, ऋण, एलसी, जीएसटी और अन्य वित्तीय कार्यों में अनावश्यक देरी होती है। उप-किरायेदारी का प्रविधान न होने के कारण बैंक किराये पर भवन लेकर शाखा नहीं खोल पा रहे हैं, जबकि गीडा में कई ऐसे भवन और प्लाट हैं, जहां आसानी से बैंक संचालित किए जा सकते हैं।

