
25 प्रतिशत जमा कर गोरखपुर में फ्लैट-दुकान पाने का सपना होगा पूरा
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (GDA) अपनी खाली पड़ी आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियों की कीमतों में संशोधन कर रहा है। अब इन संपत्तियों की दरों में 25 प्रतिशत तक की कटौती की जाएगी। खरीदार संशोधित दर का 25 प्रतिशत जमा कर तुरंत कब्जा पा सकेंगे।
गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) की लंबे समय से खाली पड़ी और अलोकप्रिय हो चुकी आवासीय व व्यावसायिक संपत्तियों की कीमत तो घटेगी ही इन्हें आवंटित कराने वालों को एक और बड़ा लाभ होगा। प्राधिकरण की ओर से कीमतों में संशोधन के बाद तय दर का 25 प्रतिशत राशि जमा करने वालों को तत्काल संपत्ति पर कब्जा भी मिल जाएगा। चूंकि ये संपत्ति पहले से बनकर तैयार हैं, इसलिए कब्जा पाने के लिए इंतजार नहीं करना होगा।
शासन से मंजूरी के बाद प्राधिकरण अपनी सभी अलोकप्रिय संपत्तियों का चिह्नांकन और निरीक्षण करा रहा है। साथ ही दरों का भी निर्धारण किया जा रहा है। जीडीए के मुताबिक यदि किसी संपत्ति में मरम्मत या रंग रोगन की जरूरत होगी तो प्राधिकरण पहले उसे पूरा कराएगा, फिर संपत्ति काे आवंटित करेगा। दरों का निर्धारण नई गाइडलाइन के अनुसार किया जा रहा है। अगले माह बोर्ड से दरों आदि को लेकर मंजूरी लेने के बाद प्राधिकरण ऐसी संपत्तियों की नए सिरे से बिक्री शुरू करेगा।
वर्तमान व्यवस्था के तहत प्राधिकरण आवासीय संपत्तियों की कीमत में हर साल 10 प्रतिशत और व्यावसायिक संपत्तियों में 12 प्रतिशत की वृद्धि करता है। करीब दो साल पहले तक यह वृद्धि और भी अधिक थी। आवासीय संपत्तियों में 15 प्रतिशत और व्यावसायिक में 18 प्रतिशत तक यह वृद्धि होती थी।
इसका नतीजा यह हुआ कि कीमतों में काफी वृद्धि हो गई। वसुंधरा योजना में जिन फ्लैटों की शुरुआती कीमत करीब 50 लाख रुपये थी, वे बढ़कर 70 लाख रुपये से अधिक हो गई। इसी तरह लोहिया एन्क्लेव के फ्लैट भी आम खरीदार की पहुंच से बाहर हो गए।
गोलघर स्थित जीडीए टावर में खाली पड़े कार्यालय ब्लाकों की कीमत सवा करोड़ रुपये से कम नहीं रह गई, जिससे छोटे कारोबारियों और उद्यमियों के लिए इन्हें खरीदना लगभग असंभव हो गया।

