
खेत से हाईटेंशन तार गुजरने पर मुआवजा देना जरूरी – हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में किसानों को बड़ी राहत देते हुए हाईटेंशन बिजली लाइन के नीचे आने वाली जमीन के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में किसानों को बड़ी राहत देते हुए हाईटेंशन बिजली लाइन के नीचे आने वाली जमीन के लिए मुआवजा देने का आदेश दिया है। शामली के किसानों की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने राज्य सरकार के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार किसानों को उचित मुआवजा दिया जाना अनिवार्य है।
शामली जिले के चार किसानों की जमीन पर हाईटेंशन बिजली ट्रांसमिशन लाइन डाली गई थी। टावर लगाने और तार खींचने से उनकी फसल, पेड़ और जमीन की कीमत प्रभावित हुई। पेड़ों और फसलों का आंशिक मुआवजा दिया गया, लेकिन तार के नीचे के कॉरिडोर क्षेत्र के लिए कोई मुआवजा नहीं दिया गया। किसानों ने कई बार प्रशासन से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हाईटेंशन लाइन के कारण जमीन की उपयोगिता और कीमत में भारी कमी आती है। जमीन पर निर्माण, पेड़ लगाने और अन्य गतिविधियों पर रोक लग जाती है। ऐसे में बिना जमीन अधिग्रहण के भी मालिक के अधिकार प्रभावित होते हैं, इसलिए मुआवजा देना जरूरी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार (ऊर्जा मंत्रालय) के आदेशों का हवाला देते हुए कहा कि 15 अक्तूबर 2015 के आदेश में रो और टावर क्षेत्र के लिए मुआवजा तय किया गया था। 14 जून 2024 के नए आदेश में मुआवजा बढ़ाकर टावर बेस क्षेत्र के लिए 200 प्रतिशत भूमि मूल्य और रो क्षेत्र के लिए 30 प्रतिशत भूमि मूल्य कर दिया गया।

