
एनएचआरसी ने खाना पकाने के तेल के दोबारा इस्तेमाल पर जारी किया नोटिस
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने देश में खाद्य तेल के बार-बार उपयोग की गंभीर समस्या पर संज्ञान लेते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआइ) को नोटिस जारी किया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने भारत में ‘खाना पकाने के तेल के बड़े पैमाने पर दोबारा इस्तेमाल’ को लेकर सामने आई शिकायत पर नोटिस जारी किया है.
यह नोटिस केंद्र सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफ़एसएसएआई) को जारी किया गया है.
आयोग ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है. साथ ही दो हफ्ते के भीतर एक्शन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है.
22 अक्तूबर को जारी नोटिस में कहा गया है कि शिकायत में लगाए गए आरोप पहली नज़र में मानवाधिकारों के ‘उल्लंघन’ जैसे प्रतीत होते हैं.
नोटिस के मुताबिक़, मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित ‘सार्थक सामुदायिक विकास एवं जन कल्याण संस्था’ के संस्थापक ने शिकायत दर्ज कराकर ‘भारत में खाना पकाने के तेल के व्यापक दोबारा इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है’.
शिकायतकर्ता का कहना है कि एफ़एसएसएआई के ‘रूको’ (रिपरपज यूज्ड कुकिंग ऑयल) अभियान के बावजूद, छोटे होटल, सड़क किनारे के ढाबे और फूड वेंडर अक्सर इस्तेमाल किए हुए तेल का दोबारा इस्तेमाल या बिक्री करते हैं.
उनका कहना है कि इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है और यह कैंसर, हृदय रोग और लिवर संबंधी बीमारियों जैसे गंभीर खतरे पैदा करता है.
एनएचआरसी के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत इसका संज्ञान लिया है. शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि उपयोग किया हुआ तेल यदि ठीक से नष्ट नहीं किया जाता, तो वह पानी और मिट्टी को प्रदूषित करता है, जिससे पर्यावरणीय खतरा उत्पन्न होता है.

